IISc के वैज्ञानिकों ने DDX3X सिंड्रोम के पीछे छिपे आणविक कारणों का पता लगाया है। यह शोध अल्जाइमर और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के इलाज के लिए नई संभावनाएं खोलता है
Edutechbharat Education Desk : भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के वैज्ञानिकों ने DDX3X सिंड्रोम के पीछे छिपे आणविक (मॉलिक्यूलर) कारणों का पता लगाया है। यह सिंड्रोम महिलाओं में बौद्धिक अक्षमता (Intellectual Disability) के सबसे सामान्य आनुवंशिक कारणों में से एक माना जाता है।
शोध में सामने आया है कि DDX3X जीन में होने वाले विशेष प्रकार के उत्परिवर्तन (Mutations) केवल इस दुर्लभ न्यूरोडेवलपमेंटल बीमारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से जुड़े तंत्र को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
IISc के जैव रसायन (Department of Biochemistry) विभाग में केशवर्दना सन्नुला (Kesavardana Sannula) के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन ने पहली बार यह स्पष्ट किया है कि DDX3X में होने वाले उत्परिवर्तन मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं (Neurons) को किस प्रकार नुकसान पहुंचाते हैं।
DDX3X प्रोटीन क्यों है महत्वपूर्ण?
DDX3X एक आवश्यक प्रोटीन है, जो कोशिकाओं में RNA की प्रोसेसिंग और तनाव (Stress) की स्थिति में सामान्य कोशिकीय प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है। अब तक वैज्ञानिक जानते थे कि DDX3X में कई रोग-कारक उत्परिवर्तन होते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि वे मस्तिष्क की कोशिकाओं को कैसे प्रभावित करते हैं।
नई रिसर्च में पता चला कि ये उत्परिवर्तन केवल DDX3X की कार्यक्षमता को कम नहीं करते, बल्कि उसकी संरचना (Structure) को बदल देते हैं। इसके परिणामस्वरूप DDX3X असामान्य Stress Granules में फंस जाता है।
कैसे होती है न्यूरॉन कोशिकाओं की मृत्यु?
सामान्य परिस्थितियों में Stress Granules अस्थायी संरचनाएं होती हैं, जो कोशिकाओं पर तनाव आने पर बनती हैं और तनाव समाप्त होने पर स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
लेकिन DDX3X के म्यूटेशन के कारण बनने वाले Stress Granules ठोस (Solid-like) और स्थायी हो जाते हैं। ये सामान्य रूप से समाप्त नहीं होते और अंततः तंत्रिका कोशिकाओं की मृत्यु का कारण बनते हैं।

कंप्यूटर मॉडलिंग और प्रयोगशाला परीक्षण से मिला बड़ा सुराग
वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडलिंग और प्रयोगशाला प्रयोगों का उपयोग करके पाया कि उत्परिवर्तन DDX3X और RNA के बीच जुड़ने (Binding) की प्रक्रिया को बदल देते हैं।
शोध में यह भी सामने आया कि कुछ रोग-कारक म्यूटेशन β-amyloid (बीटा-अमाइलॉयड) के जमाव (Aggregation) को बढ़ावा देते हैं। यही प्रोटीन अल्जाइमर रोग की प्रमुख पहचान माना जाता है।
इससे संकेत मिलता है कि DDX3X की गड़बड़ी व्यापक न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के विकास में भी भूमिका निभा सकती है।Air Marshal Praveen Keshav Vohra Visits C3iHub at IIT Kanpur, Reviews Indigenous Cybersecurity Innovations
कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का हो सकता है साझा कारण
अध्ययन बताता है कि DDX3X सिंड्रोम में पाए जाने वाले अलग-अलग म्यूटेशन अंततः एक ही रोग-तंत्र की ओर ले जाते हैं, जिसमें प्रोटीन-RNA Condensates असामान्य रूप से बनने लगते हैं और न्यूरॉन्स का सामान्य कार्य बाधित हो जाता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तंत्र केवल DDX3X सिंड्रोम तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य न्यूरोलॉजिकल और न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों में भी समान भूमिका निभा सकता है।
भविष्य के इलाज की नई दिशा
इस अध्ययन के अनुसार भविष्य में उपचार का लक्ष्य केवल DDX3X की कार्यक्षमता को बहाल करना नहीं होगा, बल्कि उन असामान्य और स्थायी Stress Granules को बनने से रोकना या उन्हें फिर से सामान्य एवं गतिशील (Dynamic) बनाना अधिक प्रभावी रणनीति हो सकती है।IIT Kanpur का नया AI कोर्स: 6 महीने में सीखें Data Science और Machine Learning, Business Analytics में बनाएं करियर
यदि इस दिशा में दवाएं विकसित होती हैं, तो वे DDX3X सिंड्रोम के साथ-साथ अल्जाइमर जैसी बीमारियों के उपचार में भी नई संभावनाएं खोल सकती हैं।






