भारत में 30 से 50 वर्ष की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जानिए एम्स दिल्ली की रिसर्च, मुख्य कारण, शुरुआती लक्षण और बचाव के आसान उपाय।
कानपुर। वैश्विक स्तर पर जहां ब्रेस्ट कैंसर के अधिकांश मामले 50 से 60 वर्ष की आयु में सामने आते हैं, वहीं भारत में यह बीमारी 40 से 50 वर्ष की उम्र में तेजी से फैल रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अब 30 वर्ष की युवतियों में भी ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण देखने को मिल रहे हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी महिलाओं की संख्या अधिक है।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में आयोजित ‘एआई मंथन’ कार्यक्रम के दौरान एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) की वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट प्रो. कृथिका रंगराजन ने महिलाओं को समय पर जांच और जागरूकता के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।
ब्रेस्ट कैंसर के मुख्य कारण (Risk Factors)
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली और दिनचर्या में बदलाव ब्रेस्ट कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
- असंतुलित जीवनशैली: शारीरिक सक्रियता की कमी, मोटापा और बढ़ता मानसिक तनाव।
- धूम्रपान और मद्यपान: तंबाकू, सिगरेट और अल्कोहल का नियमित सेवन।
- देर से गर्भधारण: अधिक उम्र में बच्चे को जन्म देना और हार्मोनल असंतुलन।
एम्स दिल्ली की विशेष रिसर्च: बीमारी के सटीक कारणों की पहचान के लिए एम्स दिल्ली ने 80 सवालों की एक प्रश्नावली तैयार की है। इस अध्ययन में महिलाओं के खानपान (शाकाहारी व मांसाहारी), डिओडोरेंट के इस्तेमाल, इनरवियर के चयन और दैनिक आदतों से जुड़ा डेटा संकलित कर गहन विश्लेषण किया जा रहा है।
शुरुआती पहचान और बचाव के लिए जरूरी कदम
ब्रेस्ट कैंसर का समय पर पता चलना ही इसके सफल इलाज की सबसे बड़ी कुंजी है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाना आवश्यक है:
1. नियमित सेल्फ असेसमेंट (Self Breast Examination)
महिलाओं को हर महीने स्वयं जांच करनी चाहिए। स्तन में किसी भी प्रकार की असामान्य गांठ, त्वचा में खिंचाव, रंग में बदलाव या दर्द महसूस होने पर बिना देर किए डॉक्टर से परामर्श लें।
2. मैमोग्राफी और ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड जांच
बीमारी की सटीक पहचान के लिए मैमोग्राफी जांच बेहद कारगर मानी जाती है। यदि किसी क्षेत्र में ब्रेस्ट रेडियोलॉजिस्ट या मैमोग्राफी की सुविधा उपलब्ध न हो, तो ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड के जरिए भी शुरुआती स्थिति को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी असामान्य लक्षण को छुपाने या नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सीय सलाह लेना ही ब्रेस्ट कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित मार्ग है।
