Edutechbharat.com/Education Desk । भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने बिजली की धारा (Electric Current) की मदद से किसी पदार्थ की चुंबकीय अवस्था (Magnetic State) को पूरी तरह बदलने की नई तकनीक विकसित की है। यह उपलब्धि भविष्य में कम ऊर्जा खपत वाली मेमोरी, लॉजिक सर्किट और क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए आवश्यक क्रायोजेनिक (अत्यंत निम्न तापमान पर काम करने वाले) इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल Nature Communications में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन का नेतृत्व IISc के डिपार्टमेंट ऑफ मैटेरियल्स इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर भगवती प्रसाद ने किया। शोध के प्रथम लेखक पीएचडी शोधार्थी सूर्यकांत मंडल हैं।
चुंबकीय अवस्था बदलने का अनोखा तरीका
अब तक अधिकांश चुंबकीय मेमोरी तकनीकों में केवल पदार्थ के चुंबकीय ध्रुव (Magnetisation) की दिशा बदली जाती थी। लेकिन IISc के वैज्ञानिकों ने पहली बार केवल दिशा बदलने के बजाय बिजली की धारा के माध्यम से पदार्थ की पूरी चुंबकीय अवस्था (Magnetic Phase) को बदलने में सफलता हासिल की है।

शोधकर्ताओं ने Sm₁₋ₓSrₓMnO₃ नामक जटिल ऑक्साइड का अध्ययन किया, जिसमें एक से अधिक चुंबकीय अवस्थाएँ मौजूद रहती हैं। प्रारंभिक प्रयोगों का उद्देश्य यह समझना था कि क्या इन प्रतिस्पर्धी चुंबकीय अवस्थाओं को सीधे विद्युत धारा से नियंत्रित किया जा सकता है।
कम करंट पर फेरोमैग्नेटिक, अधिक करंट पर नई अवस्था कम
विद्युत धारा पर यह पदार्थ फेरोमैग्नेटिक (Ferromagnetic) अवस्था में रहता है, जिसमें परमाणुओं के चुंबकीय मोमेंट एक ही दिशा में व्यवस्थित रहते हैं। इस अवस्था में विद्युत प्रतिरोध कम होता है और करंट आसानी से प्रवाहित होता है।
लेकिन जैसे ही करंट एक निश्चित सीमा (Critical Current) से ऊपर पहुंचा, पदार्थ अचानक एंटीफेरोमैग्नेटिक जैसी अवस्था (Antiferromagnetic-like State) में बदल गया। इस अवस्था में पड़ोसी परमाणुओं के चुंबकीय मोमेंट विपरीत दिशाओं में व्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे विद्युत प्रतिरोध काफी बढ़ जाता है।
शोधकर्ताओं ने यह भी सिद्ध किया कि यह परिवर्तन पूरी तरह रिवर्सिबल (Reversible) है और इसे दोबारा पहले वाली अवस्था में लौटाया जा सकता है।
क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए बड़ी संभावना
प्रो. भगवती प्रसाद के अनुसार, इस शोध की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विद्युत धारा केवल चुंबकीय दिशा नहीं बदलती, बल्कि पदार्थ की पूरी चुंबकीय अवस्था को परिवर्तित कर देती है। इससे दो स्पष्ट और स्थिर प्रतिरोध (Resistance) अवस्थाएँ प्राप्त होती हैं, जिनका उपयोग भविष्य की क्रायोजेनिक मेमोरी और लॉजिक तकनीकों में किया जा सकता है।
नैनो डिवाइस में सफल परीक्षण
शोधकर्ताओं ने इस सामग्री का उपयोग करके लगभग 250 × 250 नैनोमीटर आकार के टनल डिवाइस तैयार किए। इन सूक्ष्म उपकरणों में दो स्थिर प्रतिरोध अवस्थाएँ प्राप्त हुईं और 200 प्रतिशत से अधिक मैग्नेटोरेज़िस्टेंस दर्ज किया गया।
इन अवस्थाओं को विद्युत धारा, तापमान और चुंबकीय क्षेत्र की सहायता से नियंत्रित किया जा सकता है।

भविष्य की दिशा
यह प्रभाव अत्यंत निम्न तापमान (Cryogenic Temperature) पर सबसे अधिक प्रभावी पाया गया, इसलिए यह तकनीक भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है, क्योंकि अधिकांश क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म बेहद कम तापमान पर ही कार्य करते हैं।
अब शोधकर्ता स्विचिंग के लिए आवश्यक विद्युत धारा और ऊर्जा को कम करने, विभिन्न तापमानों पर इस तकनीक को कार्यक्षम बनाने तथा बड़े क्रायोजेनिक मेमोरी एवं लॉजिक सर्किट में इसे एकीकृत करने पर काम करेंगे। यदि यह प्रयास सफल होता है तो आने वाले वर्षों में कम ऊर्जा खपत वाले उन्नत इलेक्ट्रॉनिक और क्वांटम उपकरणों का विकास संभव हो सकेगा।
IISc के वैज्ञानिकों ने बिजली की धारा से पदार्थ की चुंबकीय अवस्था बदलने की नई तकनीक विकसित की है। यह शोध भविष्य की क्रायोजेनिक मेमोरी, लॉजिक सर्किट और क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।






