BITS पिलानी के VC प्रो. वी. रामगोपाल राव ने AI के खतरों, भारत की ‘स्मॉल AI मॉडल्स’ रणनीति और सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के भविष्य पर साझा किए महत्वपूर्ण विचार। विस्तार से पढ़ें।
Primary Keywords: AI Future India, V Ramgopal Rao, Small AI Models, Softw
Kanpur: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) केवल तकनीकी प्रगति का जरिया नहीं है, बल्कि अनियंत्रित होने पर यह परमाणु ऊर्जा जितना ही खतरनाक और विनाशकारी साबित हो सकता है। यह विचार बिट्स पिलानी (BITS Pilani) के समूह वाइस चांसलर और आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक प्रो. वी. रामगोपाल राव ने एक विशेष बातचीत के दौरान व्यक्त किए।
प्रो. राव ने चेतावनी दी कि AI सिस्टम ‘सेल्फ-लर्निंग’ मॉडल पर काम करते हैं। यदि कई शक्तिशाली AI एजेंट्स और टूल्स आपस में मिलकर बिना किसी निगरानी के कार्य करने लगें, तो उन्हें नियंत्रित करना किसी भी वैज्ञानिक या तकनीकी सिस्टम के लिए असंभव हो जाएगा।
1. व्यावसायिक होड़ बनाम नैतिक जिम्मेदारियां
ग्लोबल टेक कंपनियों के रुख पर गहरी चिंता जताते हुए प्रो. राव ने कहा:
- टेक क्षेत्र में सैकड़ों अरब डॉलर का भारी निवेश हो चुका है।
- कंपनियों के बीच आगे निकलने की अंधी प्रतिस्पर्धा के कारण नैतिकता और सुरक्षा मानक पीछे छूट रहे हैं।
- स्वतंत्र सत्यापन (Independent Verification) का अभाव और कंपनियों की अत्यधिक गोपनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े नियमन (Global AI Regulation) की राह में सबसे बड़ा रोड़ा हैं।
2. डिफेंस सेक्टर में स्वायत्त हथियारों (Autonomous Weapons) का जोखिम
रक्षा क्षेत्र में AI के उपयोग पर चर्चा करते हुए प्रो. राव ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में किसी भी घातक कार्रवाई से पहले इंसानी मंजूरी (Human-in-the-loop) अनिवार्य है। हालांकि, पूर्णतः स्वायत्त (Fully Autonomous) हथियारों की दिशा में बढ़ते कदम भविष्य में वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर संकट खड़े कर सकते हैं।
3. भारत की रणनीति: ‘स्मॉल AI मॉडल्स’ पर फोकस
अमेरिका और चीन द्वारा खरबों पैरामीटर्स वाले विशाल ‘जनरल AI मॉडल्स’ विकसित करने की होड़ के बीच भारत का दृष्टिकोण बिल्कुल व्यावहारिक है:
- विशिष्ट उपयोगिता: भारत विशाल और खर्चीले मॉडल्स के बजाय ‘स्मॉल AI मॉडल्स’ (Small AI Models) पर काम कर रहा है।
- सटीक परिणाम: ये मॉडल्स भाषा अनुवाद, स्थानीय समस्याओं और विशेष औद्योगिक अनुप्रयोगों (Niche Applications) के लिए अत्यधिक प्रभावी हैं।
- कम संसाधन खपत: इनके संचालन के लिए विशाल कम्प्यूटेशनल पावर या भारी भरकम डेटा सेंटर्स की आवश्यकता नहीं होती।
4. हार्डवेयर और R&D बजट: भारत के सामने चुनौतियां
भारत के सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर क्षेत्र पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बल्कि चुनौती बुनियादी ढांचे और फंडिंग की है:
| विवरण | भारत | अमेरिका / विकसित देश |
|---|---|---|
| R&D खर्च (GDP का %) | ~0.65% से 0.70% | ~2.7% (विशाल अर्थव्यवस्था के साथ) |
| मुख्य आवश्यकता | आधुनिक लैब्स और शुरुआती पूंजीगत निवेश | स्थापित इन्फ्रास्ट्रक्चर और निरंतर फंडिंग |
5. क्या AI से खत्म हो जाएंगी सॉफ्टवेयर नौकरियां?
AI के कारण सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स के करियर पर उठ रहे सवालों को प्रो. राव ने खारिज करते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण पेश किया:
- नौकरियां खत्म नहीं होंगी, स्वरूप बदलेगा: AI बेसिक कोडिंग और रूटीन टास्क को तेजी से कर सकता है, लेकिन पूरे सिस्टम आर्किटेक्चर को डिजाइन करना मानवीय समझ पर ही निर्भर रहेगा।
- सिस्टम इंटीग्रेशन की मांग: अलग-अलग AI मॉडल्स को एक साथ जोड़ने (System Integration) और जटिल तकनीकी समस्याओं को हल करने के लिए कुशल इंजीनियर्स की आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी।
- अपस्किलिंग है जरूरी: भविष्य में टिके रहने के लिए सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स को पारंपरिक कोडिंग से आगे बढ़कर सिस्टम आर्किटेक्चर और AI इंटीग्रेशन स्किल्स सीखनी होंगी।
टैग्स: #ArtificialIntelligence #EdutechBharat #VRamgopalRao #BITSPilani #TechCareers #AIResearch #FutureOfWork
