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स्विट्जरलैंड ( Switzerland) की बर्फीली पहाड़ियों की तलहटी में बना वह विशाल ग्लास ग्रीनहाउस (Green House) बाहर से किसी शीशमहल जैसा दिखता था, लेकिन उसके अंदर किसान लुकास हर महीने बिजली के भारी बिलों से जूझ रहा था। ग्रीनहाउस में लगे सैकड़ों हीटर, वेंटिलेशन पंखे ( Ventilation)और ऑटोमैटिक सिंचाई पंप दिन-रात चलते थे। बिना बिजली के पौधे कड़ाके की ठंड में मुरझा जाते, और बिजली का बिल इतना था कि फसल का मुनाफा लगातार घट रहा था।


लुकास अक्सर छत की ओर देखकर सोचता—ऊपर सूरज की इतनी ऊर्जा ( energy) है, फिर भी वह इसे इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर वह छत पर सामान्य काले सोलर पैनल लगा देता, तो ग्रीनहाउस के अंदर अंधेरा छा जाता और टमाटर ( tomato) की बेलें बिना धूप के दम तोड़ देतीं। धूप और बिजली के बीच का यह समझौता आधुनिक खेती (modern farming) सबसे बड़ी दुविधा थी।


तभी इस कहानी में एंट्री होती है स्विस स्टार्टअप Voltiris के वैज्ञानिकों की। निकोलस और उनकी टीम एक ऐसा विचार लेकर आए जिसने सदियों पुराने इस समीकरण को हमेशा के लिए बदल दिया। उन्होंने कहा, “पौधों (plants) को हर रंग की रोशनी नहीं चाहिए होती , उन्हें सिर्फ चुनिंदा स्पेक्ट्रम (spectrum) चाहिए—बाकी धूप हमारे काम आ सकती है।”


सालों के शोध के बाद उन्होंने खास डाइक्रोइक (Dichroic) फिल्टर ( filter) और ट्रांसलूसेंट सोलर पैनल्स (translucent solar panel) तैयार किए। यह तकनीक दिखने में किसी विज्ञान कथा जैसी थी। जब इन पैनल्स को ग्रीनहाउस की छत पर लगाया गया, तो पूरा दृश्य बदल गया। छत कांच के रंग-बिरंगे प्रिज्म जैसी चमकने लगी—मैजेंटा, गुलाबी और बैंगनी रंगों की जादुई छटा बिखर गई।


यह सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक चमत्कार था। इन पैनल्स ने सूरज की लाल और नीली रोशनी को बिना रोके सीधे नीचे पौधों तक पहुँचने दिया, ताकि प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) पूरी रफ्तार से चलता रहे। वहीं, हरी और इन्फ्रारेड ( Infrared) तरंगों को रिफ्लेक्ट करके पैनल के किनारों पर लगे हाई-एफिशिएंसी सोलर सेल्स (solar sales) पर केंद्रित कर दिया, जिससे भारी मात्रा में स्वच्छ बिजली बनने लगी।


नतीजा पूरी तरह क्रांतिकारी रहा। नीचे टमाटर ( tomato) की फसल पहले से भी ज्यादा हरी-भरी और चमकदार हो गई, और ऊपर उसी धूप से ग्रीनहाउस के सभी पंखे, हीटर और पंप मुफ्त में चलने लगे। बिजली की लागत आधी से भी कम हो गई और कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य।
Voltiris की यह खोज सिर्फ बिजली बचाने का जरिया नहीं बनी, बल्कि ग्लोबल एग्रीकल्चर के लिए एक ऐतिहासिक गेम-चेंजर साबित हुई। इसने दुनिया को दिखा दिया कि खाना उगाने और ऊर्जा पैदा करने के बीच कोई मुकाबला नहीं है—एक ही छत के नीचे, एक ही सूरज की धूप से, हम अपनी धरती को हरा-भरा भी रख सकते हैं और अपनी भूख भी मिटा सकते हैं।

पारंपरिक एग्रीवोल्टिक्स की जंग खत्म


Social media input : कृषि और सौर ऊर्जा के बीच की दशकों पुरानी प्रतिस्पर्धा—जहाँ फसल और सोलर पैनल दोनों को एक ही ज़मीन पर सूरज की रोशनी के लिए संघर्ष करना पड़ता था यह संभव नहीं था कि एक ही जमीन पर पौधे भी पाए जाएं और सोलर पैनल भी लगाया जाए


आर्गौ कैंटन के रुतिहॉफ स्थित ‘मीयर गेमुसे’ (Meier Gemüse) नामक एक फैमिली फार्म ने अपने ग्रीनहाउस की छत के नीचे टमाटर की पंक्तियों के ठीक ऊपर 1,736 सोलर मॉड्यूल्स स्थापित किए हैं। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह रही कि चार हफ्ते तक चले इंस्टॉलेशन के दौरान फार्म में टमाटरों की तुड़ाई एक दिन के लिए भी नहीं रुकी।


पौधों की रोशनी छुए बिना बिजली उत्पादन


लाज़ेन (Lausanne) की स्टार्टअप कंपनी Voltiris द्वारा बनाए गए इन मॉड्यूल्स की तकनीक बेहद अनोखी है:

  • डाइक्रोइक मिरर (Dichroic Mirror): यह फिल्टर रोशनी को दो भागों में बांटता है। पौधों के प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के लिए आवश्यक रोशनी (PAR) को यह बिना रोके सीधे फसलों तक जाने देता है।
  • हीट-जनरेटिंग रेज़ का इस्तेमाल: यह सिस्टम सूर्य की केवल नियर-इन्फ्रारेड (Near-Infrared) किरणों को रोकता है, जो केवल गर्मी पैदा करती हैं और पौधों के किसी काम नहीं आतीं।
  • माइक्रो सोलर सेल्स: इन किरणों को रिफ्लेक्ट करके एक छोटे सोलर सेल पर केंद्रित किया जाता है, जिससे यह सेटअप रोज़ाना 1 मेगावाट-घंटा (1 MWh) तक बिजली पैदा करता है।

    टमाटर की फसल और उत्पादन पर क्या असर पड़ा?

    पारंपरिक एग्रीवोल्टिक्स में छांव की वजह से फसल प्रभावित होने का जोखिम रहता है, लेकिन इस तकनीक से परिणाम उल्टे और बेहतर रहे:
    मानक परिणाम
  • उत्पादन (Yield) पड़ोसी सामान्य कम्पार्टमेंट की तुलना में चेरी टमाटर की पैदावार में 1% की बढ़ोतरी हुई।
    बिजली की बचत गर्मियों में ग्रिड बिजली की खपत में 35% की कमी आई।
    तापमान नियंत्रण पत्तों का औसतन तापमान 3°C ठंडा रहा। फसल ने 74% समय अपने सबसे अनुकूल तापमान (20°C से 25°C) में बिताया।
  • मजदूरों के लिए राहत: चिलचिलाती धूप और गर्मी के दौरान ग्रीनहाउस के इस हिस्से का तापमान कम रहने के कारण कटाई करने वाले मजदूरों ने इन्हीं पंक्तियों में काम करना पसंद किया।
  • अगला पड़ाव: नीदरलैंड में स्ट्रॉबेरी की खेती
    स्विट्जरलैंड के इस सफल प्रयोग के बाद, Voltiris अब नीदरलैंड्स के ‘गेन्सन ग्रुप’ (Genson Group) के साथ मिलकर सोमेरेन (Someren) में एक हेक्टेयर के कांच के ग्रीनहाउस पर लगभग 2,000 मॉड्यूल्स लगाने जा रहा है।
    शोध दर्शाते हैं कि स्ट्रॉबेरी को टमाटर से भी ज्यादा फायदा हो सकता है—परीक्षणों में अत्यधिक गर्मी से बचाव के कारण प्रीमियम क्वालिटी की स्ट्रॉबेरी की पैदावार में 26% तक का इजाफा देखा गया है।
    कंपनी का लक्ष्य वर्ष के अंत तक स्विट्जरलैंड, फ्रांस और नीदरलैंड्स में ऐसे आठ बड़े प्रोजेक्ट्स को चालू करने का है।