प्रकृति के ‘मल्टी-हीम’ रहस्य को सुलझाने वाले IIT Kanpur के Prof. Shankar Prasad Rath, जिन्हें मिला इस साल का National Awards to Teachers – जानिए बाढ़ ग्रस्त गांव से निकल कर IIT तक की पूरी यात्रा

मल्टी-हीम प्रोटीन में छिपे इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर और एंजाइम कैटेलिसिस के रहस्यों की खोज; 165 से अधिक शोधपत्र, 27 पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन—उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन

कानपुर। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले का मिर्जापुर गांव। ऐसा गांव जो हर साल महीनों तक बाढ़ के पानी में डूबा रहता था। स्कूल जाने के लिए पानी और कठिन परिस्थितियों से जूझने वाला एक बच्चा आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर है। यह कहानी है प्रोफेसर शंकर प्रसाद रथ की, जिनके वैज्ञानिक सफर में प्रकृति के बेहद जटिल मल्टी-हीम प्रोटीन और एंजाइम के रहस्यों को समझने का जुनून प्रमुख रहा है। भारत सरकार ने इस वर्ष उन्हें National Award to Teachers (Higher Education) के लिए चयनित किया है।

प्रोफेसर रथ की उपलब्धि इसलिए भी खास है कि उन्होंने विज्ञान को केवल कक्षा तक सीमित नहीं रखा। उनकी प्रयोगशाला में प्रकृति में मौजूद जटिल जैव-रासायनिक प्रणालियों को कृत्रिम मॉडलों के जरिए समझने की कोशिश होती है। खास तौर पर उनका शोध इस सवाल पर केंद्रित है कि एक ही प्रोटीन में कई हीम (heme) समूह मौजूद होने का जैविक महत्व क्या है और प्रकृति ने इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर तथा एंजाइम कैटेलिसिस के लिए इस जटिल संरचना को क्यों विकसित किया।

क्या हैं मल्टी-हीम प्रोटीन?

हीम एक महत्वपूर्ण जैविक अणु है, जो कई प्रोटीनों में इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर, ऑक्सीजन से जुड़ी प्रक्रियाओं और एंजाइमीय क्रियाओं में भूमिका निभाता है। सामान्यतः एक हीम वाले साइटोक्रोम की तुलना में मल्टी-हीम साइटोक्रोम में कई हीम केंद्र एक ही प्रोटीन संरचना के भीतर व्यवस्थित होते हैं।

यही व्यवस्था प्रोफेसर रथ के शोध का महत्वपूर्ण केंद्र है। मल्टी-हीम साइटोक्रोम प्रकृति में व्यापक रूप से पाए जाते हैं और इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर तथा एंजाइम कैटेलिसिस जैसी महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं। लेकिन इन प्रोटीनों में कई हीम समूहों की विशेष व्यवस्था आखिर उनकी कार्यक्षमता को किस तरह प्रभावित करती है—यह अब भी वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण शोध का विषय है।

प्रोफेसर रथ का समूह इन संरचनात्मक व्यवस्थाओं को समझने के लिए सिंथेटिक मॉडल तैयार करता है। इन मॉडलों के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया जाता है कि हीम समूहों की स्थिति, उनके बीच की दूरी, आपसी संपर्क और संरचनात्मक विकृति किस प्रकार प्रोटीन के इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर गुणों को प्रभावित करती है।

दो हीम वाले मॉडल से समझ रहे प्रकृति की डिजाइन

मल्टी-हीम साइटोक्रोम की जटिलता को समझने के लिए प्रोफेसर रथ का समूह di-heme cytochrome जैसे सरल मॉडल का अध्ययन करता है। इसमें एक ही पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला से जुड़े दो हीम समूह होते हैं।

ऐसे मॉडलों में दोनों हीम केंद्रों के बीच दिखाई देने वाले अंतर—जैसे axial ligand orientation और porphyrin ring deformation—महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। शोध का एक प्रमुख उद्देश्य यह समझना है कि क्या ये अंतर दोनों हीम समूहों के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं का परिणाम हैं।

यानी शोध का मूल सवाल केवल यह नहीं है कि प्रोटीन की संरचना कैसी है, बल्कि यह है कि एक ही प्रोटीन में मौजूद कई हीम आपस में किस तरह संवाद करते हैं और यह संवाद प्रोटीन के जैविक कार्य को कैसे नियंत्रित करता है।

प्रकृति के ‘इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर सिस्टम’ को समझने की कोशिश

मल्टी-हीम प्रोटीनों की अहमियत का एक बड़ा कारण उनका इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर से संबंध है। जीवित प्रणालियों में इलेक्ट्रॉनों का नियंत्रित स्थानांतरण ऊर्जा उत्पादन और अनेक जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है।

प्रोफेसर रथ का शोध इसी प्राकृतिक व्यवस्था को आणविक स्तर पर समझने की कोशिश करता है। सिंथेटिक मॉडल के जरिए वह उन परिस्थितियों को दोहराने का प्रयास करते हैं, जिनमें हीम समूह इलेक्ट्रॉन को स्वीकार या स्थानांतरित कर सकते हैं।

इस शोध से प्रकृति की उस अत्यधिक अनुकूलित आणविक डिजाइन को समझने में मदद मिल सकती है, जिसके जरिए जैविक प्रणालियां ऊर्जा और इलेक्ट्रॉन के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। यही वजह है कि मल्टी-हीम प्रोटीन का अध्ययन केवल बुनियादी रसायन विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि जैव-प्रेरित तकनीकों और टिकाऊ विकास से जुड़े संभावित अनुप्रयोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

‘मॉलिक्यूलर चिरैलिटी’ पर भी नजर

प्रोफेसर रथ की शोध रुचि मल्टी-हीम प्रोटीन से आगे molecular chirality तक फैली है। उनका समूह metallo-bisporphyrin hosts के माध्यम से आणविक चिरैलिटी को समझने का प्रयास करता है।

प्रकृति में DNA की double helix, प्रोटीन की α-helix और heme proteins जैसी संरचनाओं में चिरैलिटी दिखाई देती है। प्रोफेसर रथ का समूह Exciton Coupled Circular Dichroism (ECCD) जैसी spectroscopic तकनीक के माध्यम से यह समझने का प्रयास करता है कि विभिन्न अणुओं के बीच स्थानिक अंतःक्रियाएं किस तरह चिरैलिटी को उत्पन्न और नियंत्रित करती हैं।

यह शोध आणविक संरचना और उसके गुणों के बीच संबंध को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

प्रकाश से इलेक्ट्रॉन और ऊर्जा ट्रांसफर का अध्ययन

उनकी शोध रुचियों में light-induced electron/energy transfer भी शामिल है। प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीवों में reaction center proteins इलेक्ट्रॉन और ऊर्जा के स्थानांतरण की अत्यंत प्रभावी प्राकृतिक प्रणाली प्रस्तुत करते हैं।

Photosynthetic reaction center के केंद्र में chlorophyll molecules की एक विशेष जोड़ी होती है, जिसे ‘special pair’ कहा जाता है। ये अणु प्रकाश ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर की प्रक्रिया में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इन प्राकृतिक प्रणालियों का अध्ययन यह समझने में मदद कर सकता है कि प्रकृति प्रकाश ऊर्जा को किस तरह नियंत्रित इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर में बदलती है। यही समझ भविष्य में bio-inspired energy systems और कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण जैसी शोध दिशाओं के लिए उपयोगी आधार बन सकती है।

गांव की कठिनाइयों से विश्वस्तरीय शोध तक

प्रोफेसर रथ का वैज्ञानिक सफर उनके शोध जितना ही प्रेरक है। पूर्व मेदिनीपुर के बाढ़ प्रभावित मिर्जापुर गांव में बचपन बिताने वाले रथ के लिए स्कूल पहुंचना भी आसान नहीं था। महीनों तक बाढ़ का पानी रहने वाले क्षेत्र से निकलकर उन्होंने स्थानीय स्तर पर अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की।

1992 में रामकृष्ण मिशन विद्यामंदिर, बेलूर मठ से Chemistry में B.Sc. Honours और 1994 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से M.Sc. करने के बाद उन्होंने 1999 में IACS, कोलकाता से Ph.D. पूरी की। इसके बाद University of California, Davis में NIH Post-doctoral Fellow के रूप में शोध किया।

वर्ष 2004 में IIT कानपुर में Assistant Professor के रूप में नियुक्ति के बाद 2014 में Professor बने।

165 से अधिक शोधपत्र, सैकड़ों विद्यार्थियों को शोध प्रशिक्षण

प्रोफेसर रथ के शोध समूह ने अब तक 165 से अधिक शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं। उनके प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में 27 शोधार्थियों ने Ph.D., 40 विद्यार्थियों ने मास्टर प्रोजेक्ट और करीब 25 post-doctoral researchers ने शोध कार्य किया है। करीब 50 विद्यार्थियों को undergraduate projects और विभिन्न internship programmes के माध्यम से उनकी प्रयोगशाला में hands-on research training मिली है।

उनके लिए शोध का अर्थ केवल publication नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के वैज्ञानिक तैयार करना भी है। प्रयोगशाला में विद्यार्थियों को प्रयोग के माध्यम से सीखने, सवाल पूछने और स्वतंत्र वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

शोध के साथ शिक्षक की भूमिका भी मजबूत

IIT कानपुर में पिछले 22 वर्षों से UG और PG विद्यार्थियों को पढ़ा रहे प्रोफेसर रथ को 2021 में Excellence-in-Teaching Award मिल चुका है। विद्यार्थियों की confidential feedback के आधार पर उन्हें लगभग एक दशक से लगातार कई सेमेस्टर में Chairman, Senate की ओर से commendations भी मिले हैं।

उन्होंने इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के लिए ऐसा elective course विकसित किया, जिसमें रोजमर्रा की जिंदगी और जीवन प्रक्रियाओं के पीछे छिपे विज्ञान को समझाया जाता है। इसके अलावा SWAYAM-NPTEL पर उनका Bioinorganic Chemistry का ऑनलाइन पाठ्यक्रम अगस्त 2019 में शुरू हुआ और विद्यार्थियों की मांग पर अब तक सात बार दोबारा संचालित किया जा चुका है।

बाढ़ के पानी से निकलकर विज्ञान की गहराई तक

मिर्जापुर गांव में स्कूल जाने के लिए बाढ़ से लड़ने वाला वह बच्चा आज प्रकृति की उन आणविक संरचनाओं को समझने में जुटा है, जिनके भीतर इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण जीवन की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को संचालित करता है।

प्रोफेसर शंकर प्रसाद रथ की कहानी में इसलिए केवल एक शिक्षक की उपलब्धि नहीं, बल्कि जिज्ञासा से शोध तक और संघर्ष से उत्कृष्टता तक की यात्रा दिखाई देती है। मल्टी-हीम प्रोटीन के जरिए प्रकृति के ‘डिजाइन’ को समझने की उनकी कोशिश और विद्यार्थियों को प्रयोग आधारित शिक्षा देने का उनका दृष्टिकोण उन्हें उस शिक्षक की श्रेणी में खड़ा करता है, जिसकी उपलब्धि केवल पुरस्कार से नहीं, बल्कि तैयार किए गए वैज्ञानिकों और बदली हुई जिंदगियों से मापी जाती है।

Keywords: प्रोफेसर शंकर प्रसाद रथ,

Related Posts

IITs के 28 फ्री कोर्सेज से बनाएं शानदार टेक करियर: बिना फीस और बिना एंट्रेंस एग्जाम के सीखें टॉप स्किल्स

Education Desk: आज के दौर में जब प्राइवेट टेक बूटकैंप्स और सर्टिफिकेशन प्रोग्राम्स के नाम पर लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं, देश के शीर्ष संस्थान (IITs) और भारत सरकार…

एसएससी जेई परीक्षा के लिए फॉर्म भरें, 1748 पदों पर आवेदन की अंतिम तिथि 22 सितंबर

केंद्र सरकार के एक दर्जन से अधिक विभागों में मिल रहा मौका कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने जूनियर इंजीनियर (जेई) के कुल 1,748 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन…