सपना पूरा करने का जुनून , 51 साल की उम्र में पास किया NEET, MBBS कर बनेंगे डॉक्टर

2 PhD और MBA के बाद 51 साल की उम्र में बने ‘मेडिकल स्टूडेंट’

34 साल पुराना सपना पूरा कर छा गए सुरेश कुमार!​

education Desk :”मैं इस दुनिया से इस अफ़सोस के साथ नहीं जाना चाहता था कि मेरा एक सपना अधूरा रह गया। उम्र कभी भी आपके सपनों के आड़े नहीं आनी चाहिए।” यह कहना है तमिलनाडु के 51 वर्षीय सुरेश कुमार का जिन्होंने इसी साल नीट परीक्षा में सफलता हासिल कर एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की है।

“सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती” — इस कहावत को तमिलनाडु के 51 वर्षीय ए. सुरेश कुमार ने सच साबित कर दिखाया है। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के पूरे 34 साल बाद, 2 PhD और एक MBA की डिग्री हासिल कर चुके सुरेश कुमार ने NEET परीक्षा पास कर देश भर में प्रेरणा की एक नई मिसाल कायम की है।

​नागापट्टिनम जिले के वेलांगन्नी के रहने वाले सुरेश कुमार को उनके घर के पास ही स्थित ‘नागापट्टिनम मेडिकल कॉलेज’ में MBBS की सीट आवंटित हुई है। जल्द ही वे अपने से आधी उम्र के छात्रों के साथ मेडिकल कॉलेज के क्लासरूम में स्टेथोस्कोप थामे नजर आएंगे।​

1992 में छूटा था सपना, 2026 में रचा इतिहास​

सुरेश कुमार ने वर्ष 1992 में 12वीं की परीक्षा पास की थी और वे तभी से डॉक्टर बनना चाहते थे। लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्हें डॉक्टरी छोड़कर फार्मेसी की राह चुननी पड़ी।​

आगे चलकर उन्होंने फार्मास्यूटिकल और डायग्नोस्टिक सेक्टर में एक सफल करियर बनाया, दो-दो PhD और MBA की डिग्रियां हासिल कीं। फिर भी, दिल के किसी कोने में छिपा ‘डॉक्टर’ बनने का सपना कभी धुंधला नहीं पड़ा।​

जैसे ही NEET परीक्षा से उम्र की अधिकतम सीमा (Age Limit) हटाई गई, सुरेश कुमार के सोए हुए सपनों को नए पंख मिल गए।​

दिन में नौकरी, रात 10 से 12 पढ़ाई और सुबह 4 बजे अलार्म

​एक तरफ कॉर्पोरेट नौकरी का दबाव और दूसरी तरफ NEET की कठिन तैयारी — यह सफर इतना आसान नहीं था। सुरेश कुमार ने अपनी तैयारी के अनोखे तरीके साझा किए :​

बेटे को पढ़ाते-पढ़ाते खुद पढ़ा:

बायोलॉजी से जुड़ाव बनाए रखने के लिए सुरेश अपने बेटे को खुद बायोलॉजी पढ़ाते थे।

तमिलनाडु में स्थानीय मीडिया से बातचीत करते सुरेश कुमार वीडियो ग्रैब

​रात-रात भर पढ़ाई: दिनभर नौकरी करने के बाद वे रात 10 बजे से 12 बजे तक किताबों में डूबे रहते थे।​

पत्नी बनीं सबसे बड़ी ताकत: सुरेश की पत्नी उन्हें रोजाना सुबह 4 बजे जगाती थीं, उनके लिए चाय-नाश्ता तैयार करती थीं और उनका हौसला बनाए रखती थीं। बाद में उन्होंने सुरेश को नौकरी छोड़कर पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

​2023 से 2025 तक का कठिन अभ्यास: पिछले 3 सालों के दौरान उन्होंने पुराने प्रश्न पत्रों को लगातार हल किया और अपनी गलतियों में सुधार किया।

​पहली बार में मिली हार, तो बदला तरीका

​सुरेश कुमार का यह दूसरा प्रयास था। पहली बार उन्होंने NEET की परीक्षा तमिल भाषा में दी थी, लेकिन सफलता नहीं मिली।​इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदली। चूंकि उन्होंने अपने 34 साल के करियर में अंग्रेजी का ही इस्तेमाल किया था, इसलिए दूसरे प्रयास में उन्होंने अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा दी और शानदार सफलता हासिल की। (वे एक सड़क दुर्घटना के कारण हुए दिव्यांगता कोटे के तहत चयनित हुए हैं)।

​”अधूरे सपने के पछतावे के साथ दुनिया नहीं छोड़ना चाहता था”​

मीडिया से बात करते हुए सुरेश कुमार ने मुस्कुराते हुए कहा:​”मैं इस दुनिया से इस अफ़सोस के साथ नहीं जाना चाहता था कि मेरा एक सपना अधूरा रह गया। उम्र कभी भी आपके सपनों के आड़े नहीं आनी चाहिए।”​51 साल की उम्र में अब सुरेश कुमार अपनी पुरानी उपलब्धियों और अनुभव को पीछे छोड़कर एक नए ‘मेडिकल स्टूडेंट’ के रूप में अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। उनका यह सफर हर उस इंसान के लिए एक मिसाल है जो बढ़ती उम्र को अपने सपनों की रुकावट मान लेता है।

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