सोपान आश्रम में ‘जॉय ऑफ फिजिक्स’ व NAEST-2026: प्रयोग, प्रेरणा और साहित्य के संगम से चमकी युवा प्रतिभाएं
Kanpur: किताबों के भारी बस्ते, नंबरों की अंधी दौड़ और कोचिंग के तनाव के बीच कानपुर के सोपान आश्रम में विज्ञान का एक ऐसा उत्सव सजा, जहाँ न कोई डर था और न रटने की मजबूरी। मौका था NAEST-2026 और ‘जॉय ऑफ फिजिक्स’ के दो दिवसीय पड़ाव का, जहाँ 42 नन्हें वैज्ञानिकों ने जाना कि विज्ञान सवालों से डरना नहीं, जिंदगी को खुलकर जीना सिखाता है।
“तनाव मत लो, खिलखिलाकर पढ़ो”
कार्यक्रम के दूसरे दिन की सुबह किसी आम सेमिनार जैसी औपचारिक नहीं थी। देश के कोने-कोने से आए 42 चयनित बच्चे देश के प्रख्यात भौतिक विज्ञानी पद्मश्री प्रो. एच. सी. वर्मा के इर्द-गिर्द बैठे थे। बच्चों के मन में पढ़ाई का दबाव और भविष्य की उलझनें थीं, लेकिन प्रो. वर्मा ने मुस्कुराते हुए एक ऐसा मंत्र दिया जिसने पूरे हॉल का माहौल हल्का कर दिया।
“पढ़ाई हो या आम जिंदगी, तनाव बिल्कुल मत पालो। मस्त रहकर पढ़ो, दिल खोलकर खेलो, भरपूर नींद लो, अच्छा और पौष्टिक खाना खाओ तथा अपनी जिंदगी का पूरा आनंद लो। विज्ञान दिमाग पर बोझ डालकर नहीं, खुले मन से महसूस करके सीखा जाता है।”
यह सुनते ही बच्चों के साथ-साथ पीछे बैठे अभिभावकों के चेहरों पर भी सुकून तैर गया। जब इन 42 होनहारों को प्रो. वर्मा के हाथों सेमीफाइनलिस्ट का प्रमाण-पत्र मिला, तो कई माता-पिता की आँखें गर्व और खुशी से नम थीं।
किताबों की कैद से बाहर निकला विज्ञान: पाइप, गुब्बारे और जादू
अक्सर विज्ञान को जटिल समीकरणों और प्रयोगशालाओं की दीवारों तक सीमित मान लिया जाता है, लेकिन सोपान आश्रम का नजारा कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा था।
- दैनिक चीजों से चमत्कार: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित मनीष यादव जब मंच पर आए, तो उनके हाथ में कोई महंगा वैज्ञानिक उपकरण नहीं, बल्कि आम रसोई और घर का सामान था—स्ट्रॉ पाइप, गुब्बारे, पानी का गिलास और चुंबक। उन्होंने जब हवा के दबाव और चुंबकीय तरंगों के हैरतअंगेज खेल दिखाए, तो बच्चे तालियां बजाते नहीं थके। बच्चों ने साक्षात देखा कि विज्ञान उनकी अपनी रसोई और आंगन में हर पल सांस ले रहा है।
- अपने हाथों से गढ़ने की सीख: प्रो. वर्मा ने पहले दिन उद्घाटन के समय ही स्पष्ट कर दिया था कि NAEST केवल परीक्षा नहीं, एक सोच है। उन्होंने कहा—“हम बच्चों को सिर्फ प्रयोग देखने नहीं देते, बल्कि चाहते हैं कि वे चीजों को खुद जोड़ें, तोड़ें और अपने हाथों से करके सीखें। जब दिमाग खुद सोचना शुरू करता है, तभी असली वैज्ञानिक जन्म लेता है।”
IIT कानपुर के विशाल गलियारों में सपनों की नई उड़ान
किताबी ज्ञान से परे जब इन बच्चों को ‘E-Spin’ ले जाया गया, तो उन्होंने डॉ. संदीप पाटिल की लैब में नैनोफाइबर बनते और मास्क की आधुनिक तकनीक को आकार लेते देखा।
इसके बाद कारवां पहुंचा देश के शीर्ष संस्थान IIT कानपुर। परिसर में कदम रखते ही बच्चों की आँखों में भविष्य के सपने चमकने लगे। भौतिकी विभाग की न्यूक्लियर फिजिक्स लैब में डॉ. आदित्य केलकर ने जब बच्चों को विशाल Tandetron Accelerator दिखाया और इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म के जीवंत प्रयोग करके समझाए, तो बच्चों की जिज्ञासा चरम पर थी। वहीं प्रो. अनुराग त्रिपाठी और प्रो. कांतेश बालानी ने बच्चों से आत्मीय संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया कि वे भी कल के बड़े शोधकर्ता बन सकते हैं।
जब भौतिकी के सूत्र कविताओं में ढल गए
दूसरे दिन की शाम सोपान आश्रम में विज्ञान और साहित्य का एक दुर्लभ संगम देखने को मिला। आश्रम का प्रांगण एक जीवंत कवि सम्मेलन में तब्दील हो गया।
श्री विनय कुमार मिश्रा व शिप्रा ज्ञानेंद्र के संचालन और कवि लाल सिंह प्रहरी की मौजूदगी के बीच सबसे बड़ा आकर्षण रहे स्वयं प्रो. एच. सी. वर्मा। भौतिकी की दुनिया में अपने तर्कों के लिए जाने जाने वाले प्रोफेसर वर्मा जब अपनी गूढ़ और संवेदनशील कविताओं के साथ मंच पर आए, तो श्रोता भावविभोर हो गए।
शिक्षा सोपान के समर्पित कार्यकर्ताओं—रंजीत, अतुल, रितेश, विपिन, दीपू, योगेश और ओम कृष्ण मिश्रा की आत्मीयता ने इस आयोजन को एक पारिवारिक उत्सव बना दिया।
सोपान आश्रम के इन दो दिनों ने यह साबित कर दिया कि जब विज्ञान को तनाव और रटने की बेड़ियों से आजाद कर दिया जाता है, तो वह जिंदगी जीने का सबसे खूबसूरत सलीका बन जाता है।





