कानपुर (EdutechBharat.com): उच्च शिक्षण और शोध के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुके भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने एक नया शैक्षणिक कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान के आठ प्रमुख वैज्ञानिकों एवं प्राध्यापकों को भारत की दो शीर्ष वैज्ञानिक संस्थाओं—’इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी’ (INSA) और ‘द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया’ (NASI)—का फेलो (Fellow) चुना गया है। यह विशिष्ट राष्ट्रीय सम्मान 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा।
किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान के लिए एक साथ आठ प्रोफेसरों का राष्ट्रीय अकादमियों में फेलो चुना जाना एक दुर्लभ और ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह सम्मान आईआईटी कानपुर के उन्नत शोध कार्यक्रमों, नवाचार (Innovation) और अकादमिक उत्कृष्टता (Academic Excellence) की वैश्विक प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है।
इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के नए फेलो और उनका वैज्ञानिक योगदान
1. प्रो. विश्वनाथन शंकर (केमिकल इंजीनियरिंग विभाग)

- अनुसंधान एवं वैज्ञानिक व्यक्तित्व: जटिल तरल पदार्थों (Complex Fluids) और द्रव यांत्रिकी (Fluid Mechanics) के क्षेत्र में मौलिक शोधकर्ता।
- प्रमुख योगदान: प्रो. शंकर ने विस्कोइलास्टिक शियर फ्लो में लीनियर अस्थिरताओं (Linear Instabilities) और इलास्टिक टर्बुलेंस के सिद्धांतों को स्पष्ट किया है। इनके शोध ने औद्योगिक पाइपलाइनों में ऊर्जा की खपत घटाने वाले ड्रैग रिडक्शन (Drag Reduction) और फ्लूइड डायनामिक्स को नई दिशा दी है।
2. प्रो. बी. वी. रथीश कुमार (गणित विभाग)

- अनुसंधान एवं वैज्ञानिक व्यक्तित्व: अनुप्रयुक्त गणित (Applied Mathematics) और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी को जोड़ने वाले विशेषज्ञ।
- प्रमुख योगदान: इन्होंने वेवलेट-आधारित पीडीई (PDE) विधियों और मल्टी-स्केल वेरियेशनल मॉडल्स का विकास किया है। साथ ही, कार्डियोवैस्कुलर फ्लो, कार्डियक इलेक्ट्रिक एक्टिविटी, न्यूरो-इमेजिंग और कैंसर मॉडलिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI/ML) और डीप लर्निंग के प्रयोग को नई गति दी है।
3. प्रो. रामसुब्बू शंकररामकृष्णन (बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग – BSBE)

- अनुसंधान एवं वैज्ञानिक व्यक्तित्व: मेम्ब्रेन प्रोटीन्स और बायोफिज़िक्स के क्षेत्र में वैश्विक दृष्टि देने वाले वैज्ञानिक।
- प्रमुख योगदान: पौधों में एक्वापोरिन्स की सब-फैमिली की खोज कर पादप विकास (Plant Evolution) का नया सिद्धांत प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त, प्रोटीन स्टेबिलिटी में नॉन-कोवेलेंट इंटरैक्शन के नियमों को स्थापित कर कैंसर रोधी दवाओं (Oncology Drug Design) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4. प्रो. कांतेश बलानी (मटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग)

- अनुसंधान एवं वैज्ञानिक व्यक्तित्व: बायो-मटेरियल्स, टिश्यू इंजीनियरिंग और एडवांस्ड कम्पोजिट्स के अग्रणी शोधकर्ता।
- प्रमुख योगदान: बायोसरफेस पर प्रोटीन जुड़ाव और सेल्यूलर रिस्पॉन्स के विज़ुअलाइज़ेशन पर उत्कृष्ट कार्य किया। प्रो. बलानी ने बायोमेडिकल और ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स के लिए अत्यधिक मजबूत, जीवाणुरोधी (Antibacterial) और टिकाऊ यूएचएमडब्ल्यूपीई (UHMWPE) कम्पोजिट्स का विकास किया है।
द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) के नए फेलो और उनका वैज्ञानिक योगदान
5. प्रो. शांतनु भट्टाचार्य (मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग)

- अनुसंधान एवं वैज्ञानिक व्यक्तित्व: माइक्रो/नैनो-फैब्रिकेशन और डिवाइस इंजीनियरिंग के नवाचारी वैज्ञानिक।
- प्रमुख योगदान: बायो-मेम्स (Bio MEMS), लैब-ऑन-चिप, माइक्रोफ्लूइडिक्स, सेंसर, ध्वनिक मेटामेटेरियल्स और जल शोधन तकनीकों के विकास में अग्रणी। प्रो. भट्टाचार्य वर्तमान में CSIR-CSIO के निदेशक हैं तथा CSIR-CEERI पिलानी के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।
6. प्रो. योगेश एस. चौहान (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग)

- प्रमुख योगदान: उन्नत सिलिकॉन ट्रांजिस्टर (FinFET, FDSOI, DDSOI) और 5G/6G संचार हेतु GaN/GaAs HEMT मॉडलिंग विकसित की। इनके द्वारा विकसित कॉम्पैक्ट मॉडल दुनिया भर की अग्रणी सेमीकंडक्टर कंपनियों द्वारा चिप डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर (SPICE Simulators) में उपयोग किए जाते हैं।
- अनुसंधान एवं वैज्ञानिक व्यक्तित्व: सेमीकंडक्टर डिवाइस फिजिक्स और कॉम्पैक्ट मॉडलिंग के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ।
7. प्रो. सिद्धार्थ पांडा (केमिकल इंजीनियरिंग विभाग)

- अनुसंधान एवं वैज्ञानिक व्यक्तित्व: केमिकल सेंसर्स और प्रिंटेड इलेक्ट्रॉनिक्स के विशेषज्ञ।
- प्रमुख योगदान: ट्रांसपोर्ट फेनोमेना और मैटेरियल्स प्रोसेसिंग के सिद्धांतों को फ्लेक्सिबल एवं प्रिंटेड इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित सेंसिंग सिस्टम्स में बदला। इनके शोध का व्यापक अनुप्रयोग रोग निदान (Disease Diagnostics), खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण निगरानी में हो रहा है।
8. प्रो. निशांत नारायणन नायर (केमिस्ट्री विभाग)

- अनुसंधान एवं वैज्ञानिक व्यक्तित्व: कम्प्यूटेशनल केमिस्ट्री और उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं के विश्लेषक।
- प्रमुख योगदान: हाइब्रिड क्वांटम मैकेनिक्स/मॉलिक्यूलर मैकेनिक्स (QM/MM) और मॉलिक्यूलर डायनामिक्स तकनीकों का विकास किया। प्रो. नायर के शोध से एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता (Beta-lactamases Resistance) के तंत्र और औद्योगिक कैटालिसिस को गहराई से समझने में मदद मिली है।
आईआईटी कानपुर की वैज्ञानिक और शैक्षणिक श्रेष्ठता का प्रमाण
राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित विज्ञान अकादमियों में एक साथ 8 प्राध्यापकों का चुना जाना यह साबित करता है कि आईआईटी कानपुर न केवल उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य, सेमीकंडक्टर, जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश को आत्मनिर्भर बनाने वाले शोध कार्यों का नेतृत्व भी कर रहा है। संस्थान की यह उपलब्धि भारत के वैज्ञानिक परिदृश्य में एक मील का पत्थर है।





