कानपुर (Edutechbharat. Com):
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की धीमी चार्जिंग और बैटरी लाइफ की सीमाओं को समाप्त करने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने सुपरकैपेसिटर के लिए एक नया ‘हाइब्रिड इलेक्ट्रोड मटेरियल’ (Hybrid Electrode Material) और उसके संश्लेषण की सरल विधि विकसित की है। भारत सरकार द्वारा इस नवोन्मेषी तकनीक को भारतीय पेटेंट (पेटेंट संख्या: 592200) प्रदान किया गया है।
इस अभूतपूर्व शोध को आईआईटी कानपुर के रसायन विज्ञान विभाग (CHM) के वैज्ञानिक प्रकाश चंद्र मोंडल, नेहा सिंह और प्रियंका मक्कड़ की टीम ने तैयार किया है।
क्या है यह तकनीक और कैसे करती है काम?
यह तकनीक सुपरकैपेसिटर की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देती है। इसमें मेटल ऑक्साइड नैनोपार्टिकल्स (CuFe_2O_4) की सतह पर विशेष रूप से तैयार कार्बनिक अणुओं (Organic Molecules) को कोवेलेंट बॉन्डिंग (Aryl Diazonium Salts Chemistry – 8-Aminoquinoline) के जरिए मजबूती से जोड़ा जाता है।
यह मॉलिक्यूलर कोटिंग सतह पर \pi-कंजुगेटेड मॉलिक्यूलर ब्रिज का निर्माण करती है, जो इलेक्ट्रॉन परिवहन (Electron Transport) के लिए बेहद सुगम व तेज मार्ग तैयार कर देती है। इस मजबूत रासायनिक जुड़ाव के कारण इलेक्ट्रोड की सतह खराब (Degrade) नहीं होती और डिवाइस हजारों चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के बाद भी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करता रहता है।
प्रयोगशाला में सफल परीक्षण (Proof of Concept)
शोध दल द्वारा विकसित दो-इलेक्ट्रोड सॉलिड-स्टेट सिमेट्रिक डिवाइस के प्रोटोटाइप परीक्षण में इसके परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं:
- शोधकर्ताओं ने 3\text{ M KOH} इलेक्ट्रोलाइट और व्हाटमैन फिल्टर पेपर को सेपरेटर के रूप में उपयोग कर प्रोटोटाइप तैयार किया।
- केवल 60 सेकंड (1 मिनट) की चार्जिंग पर इस डिवाइस ने 180 सेकंड (3 मिनट) तक ग्रीन एलईडी को लगातार जलाए रखा, जो इसकी उच्च ऊर्जा भंडारण और त्वरित पावर डिलीवरी को प्रमाणित करता है।
पारंपरिक ईवी चार्जिंग के मुकाबले यह कितनी ज्यादा प्रभावशाली है?
वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहनों में मुख्य रूप से लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरी का उपयोग किया जाता है। इसकी तुलना में आईआईटी कानपुर की यह हाइब्रिड सुपरकैपेसिटर तकनीक तकनीक कई बड़े फायदे देती है:
- अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग (सेकंडों और मिनटों में चार्जिंग): पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी में रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिसके कारण फास्ट चार्जर से भी 80% चार्ज होने में 35 से 60 मिनट लगते हैं। वहीं, सुपरकैपेसिटर इलेक्ट्रोस्टैटिकली और इंटरफेशियल स्तर पर ऊर्जा स्टोर करते हैं। यह नई तकनीक वाहनों को मिनटों में फुल चार्ज करने की क्षमता प्रदान करती है।
- लंबी लाइफसाइकिल और शून्य डिग्रेडेशन: लिथियम बैटरी 1,000 से 2,000 चार्जिंग चक्रों के बाद कमजोर होने लगती हैं और उन्हें बदलना पड़ता है। जबकि यह हाइब्रिड तकनीक हजारों चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के बाद भी बिना डिग्रेड हुए स्थिर प्रदर्शन देती है।
- बेहतर रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और तात्कालिक पावर: इलेक्ट्रिक वाहन जब ब्रेक लगाते हैं, तो उत्पन्न ऊर्जा को पारंपरिक बैटरी तेजी से सोख नहीं पाती हैं। सुपरकैपेसिटर उस ऊर्जा को पलक झपकते स्टोर कर लेते हैं और वाहन को जरूरत पड़ने पर तुरंत उच्च पावर (High Power Density) प्रदान करते हैं।
- हाइब्रिड स्टोरेज का भविष्य: ऑटोमोबाइल उद्योग इस तकनीक को लिथियम बैटरी के साथ जोड़कर ‘हाइब्रिड एनर्जी सिस्टम’ के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, जिससे बैटरी पर लोड कम होगा और चार्जिंग गति कई गुना तेज हो जाएगी।
प्रमुख अनुप्रयोग एवं बाजार क्षमता
- उपयोग के क्षेत्र: इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), सुपरकैपेसिटर, पोर्टेबल व वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज और बैकअप पावर सिस्टम।
- कम लागत और आसान निर्माण: यह तकनीक सॉल्यूशन-प्रोसेसेबल और स्केलेबल है, यानी इसे बड़े पैमाने पर कम लागत में औद्योगिक स्तर पर आसानी से ढाला जा सकता है।
- वर्तमान स्थिति: तकनीक वर्तमान में TRL-4 (Technology Readiness Level 4) चरण पर है और एडवांस एनर्जी मैटेरियल्स के क्षेत्र में उद्योगों के साथ लाइसेंसिंग के लिए पूरी तरह तैयार है।
