CISF ने IIT Kanpur के साथ दो अहम समझौते किए। जवानों को मिलेगी आधुनिक साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग और राजस्थान के बहरोड़ में बनेगा ड्रोन-एंटी ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए CISF का तकनीकी कदम
Kanpur : EduTech Bharat
एक क्लिक से पूरे सिस्टम को ठप करने वाले साइबर हमले हों या आसमान से मंडराता संदिग्ध ड्रोन—देश के महत्वपूर्ण व संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) अब दोनों मोर्चों पर तकनीकी जवाब तैयार करेगी।
राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस के अवसर पर सीआइएसएफ ने IIT कानपुर के साथ साइबर सुरक्षा और ड्रोन-एंटी ड्रोन तकनीक को लेकर दो महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights Box)
- आईआईटी कानपुर और सीआइएसएफ के बीच साइबर व ड्रोन तकनीक को लेकर दो बड़े समझौते संपन्न।
- सी3आईहब (C3iHub) में हर बैच में 40 जवानों को 6 सप्ताह का फ्री आवासीय साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण मिलेगा।
- राजस्थान के बहरोड़ (MPRTC) में 5 साल के लिए स्थापित होगा ड्रोन-एंटी ड्रोन ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’।
- गृह मंत्रालय के विजन के तहत सीएपीएफ (CAPF) के लिए विशेषज्ञ ‘साइबर कमांडो’ तैयार करने की मुहिम।
C3iHub IIT Kanpur: 40 जवानों का होगा 6 सप्ताह का विशेष आवासीय प्रशिक्षण
आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी हब (C3iHub) के साथ हुए समझौते के तहत अगले 3 वर्षों तक 6 सप्ताह का आवासीय और निश्शुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। प्रत्येक बैच में सीआइएसएफ के 40 जवान शामिल होंगे।
- प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र: डिजिटल फोरेंसिक, इंसिडेंट रिस्पांस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (AI-ML), डीपफेक तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्लाउड सिक्योरिटी और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी।
- क्राइसिस सिमुलेशन अभ्यास: एविएशन, पावर ग्रिड और न्यूक्लियर सेक्टर जैसे क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित हमलों से निपटने के लिए जवानों को लाइव क्राइसिस सिमुलेशन कराया जाएगा।
- साइबर कमांडो विंग: यह पहल केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देशानुसार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में स्पेशलाइज्ड ‘साइबर कमांडो’ तैयार करने की योजना का प्रमुख हिस्सा है।
🛡️ बहरोड़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: तकनीकी क्षमताएं (Tech Overview Box)
- स्थान व अवधि: सीआइएसएफ आरटीसी (MPRTC), बहरोड़ (राजस्थान) में 5 वर्ष की अवधि के लिए केंद्र की स्थापना।
- रिसर्च फोकस: यूएवी (UAV) ऑपरेशंस, ड्रोन फोरेंसिक तथा मानव रहित प्रणालियों की साइबर सुरक्षा पर ट्रेनिंग और रिसर्च।
- डिटेक्शन सिस्टम: संदिग्ध ड्रोन्स की पहचान हेतु रडार-आरएफ (Radar-RF) और माइक्रो-डॉपलर डिटेक्शन पर संयुक्त अध्ययन।
- लैब इंफ्रास्ट्रक्चर: हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशंस के लिए आधुनिक सिमुलेटर और एडवांस फोरेंसिक लैब का विकास।
क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीक पर जोर
सीआइएसएफ ने इससे पहले भी IIT मद्रास, IIT रोपड़, IIITDM कांचीपुरम और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ रणनीतिक सहयोग स्थापित किया है।
आईआईटी कानपुर के साथ यह नया केंद्र देश के क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की हिफाजत के लिए स्वदेशी ड्रोन और साइबर सुरक्षा समाधानों (Make in India Security Solutions) के विकास को नई रफ्तार देगा।
✍️ हस्ताक्षरकर्ता (Signatories Box)
- साइबर सुरक्षा एमओयू: सीआइएसएफ आईजी सेंथिल अवुडई कृष्णा राज एस. और C3iHub की सीईओ डॉ. तनिमा हाजरा।
- ड्रोन तकनीक एमओयू: सीआइएसएफ एमपीआरटीसी बहरोड़ के डीआईजी डॉ. सी. धनंजय नाइक और आईआईटी कानपुर के डीन (R&D) प्रो. जयधरन जी. राव।





