CSJMU दाखिला 2026: समर्थ पोर्टल पर WRN के लिए मिला 4 दिन का अतिरिक्त मौका, 7 जिलों के 600+ संबद्ध कॉलेजों को मिली बड़ी राहत
कानपुर (Edutechbharat.com): छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर से संबद्ध कॉलेजों में दाखिले के इंतजार में बैठे हजारों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने समर्थ पोर्टल पर वेब रजिस्ट्रेशन नंबर (WRN) जनरेट करने की प्रक्रिया को बुधवार से पुनः सक्रिय कर दिया है। अब वंचित छात्र 19 सितंबर तक अपना WRN पंजीकरण कराकर कॉलेजों में वैध प्रवेश सुनिश्चित कर सकेंगे।
CSJMU से कितने महाविद्यालय संबद्ध हैं?
वर्तमान में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में 7 प्रमुख जनपद (कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, औरैया, इटावा, फर्रुखाबाद और कन्नौज) आते हैं।
- इन सात जनपदों के अंतर्गत लगभग 600 से 700 महाविद्यालय (राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित) CSJMU से संबद्ध हैं।
- पूर्व में सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई और रायबरेली के अलग होने के बाद अब विश्वविद्यालय का संपूर्ण दायरा इन 7 जिलों पर केंद्रित है।
क्या था मामला और क्यों अटका दाखिला?
विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण और WRN अनिवार्य दस्तावेज है।

- राजभवन (कुलाधिपति) के कड़े निर्देशों के चलते इस सत्र में प्रवेश के लिए समय-सीमा तय की गई थी और पोर्टल को 31 अगस्त को बंद कर दिया गया था।
- कई महाविद्यालयों ने सीटों पर सीधे छात्रों को दाखिला तो दे दिया था, लेकिन WRN प्रक्रिया पूरी न होने के चलते उनका डेटा विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पा रहा था।
- पोर्टल बंद होने से हजारों छात्र दाखिले की दौड़ से बाहर होने के कगार पर पहुंच गए थे, जिससे संबद्ध कॉलेजों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।
महाविद्यालयों और छात्रों पर इसका क्या असर होगा?
- छात्रों का साल बर्बाद होने से बचा: जिन छात्रों ने कॉलेजों में सीटें ले रखी थीं लेकिन तकनीकी व समय-सीमा की बाधा के चलते WRN से चूक गए थे, उनका दाखिला अब वैध हो जाएगा।
- महाविद्यालयों की खाली सीटों का संकट टला: 600 से अधिक संबद्ध महाविद्यालयों (विशेषकर स्ववित्तपोषित कॉलेजों) में बड़ी संख्या में सीटें रिक्त पड़ी थीं। 4 दिन की इस विंडो से कॉलेजों को अपनी सीटें भरने और वित्तीय नुकसान से बचने में मदद मिलेगी।
- कॉलेजों के लिए सख्त प्रशासनिक सबक: पहले जहां प्रवेश प्रक्रिया अक्टूबर-नवंबर तक खिंचती थी, वहीं इस बार शासन के सख्त रुख से यह साफ हो गया है कि भविष्य में बार-बार तारीखें नहीं बढ़ेंगी। 19 सितंबर के बाद कॉलेजों पर समयबद्ध प्रवेश और एकेडमिक कैलेंडर पूरा करने की सख्त जवाबदेही होगी।

उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन ने विश्वविद्यालय के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे विशुद्ध रूप से “छात्र हित में लिया गया कदम” बताया है और सभी संबद्ध कॉलेजों से 19 सितंबर से पहले शेष सभी दाखिलों की प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है।





