केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि NEET को JEE की तरह दो चरणों में और कंप्यूटर आधारित (CBT) कराने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। NTA की परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़े सुधार किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा बयान :
Edutech News Desk : मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि NEET को JEE की तर्ज पर दो चरणों में आयोजित करने और इसे कंप्यूटर आधारित (CBT) परीक्षा में बदलने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
हालांकि अंतिम निर्णय हाई-लेवल टास्क फोर्स की सिफारिशों और सभी संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद लिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने यह जानकारी NEET-UG 2026 से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में दी। सरकार ने कहा कि 2024 और उसके बाद सामने आई परीक्षा संबंधी चुनौतियों से सबक लेते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए गए हैं, ताकि भविष्य में परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा की दिशा में तैयारी
हलफनामे के अनुसार, NTA की अधिकांश राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएं पहले ही कंप्यूटर आधारित हो चुकी हैं, लेकिन NEET अभी भी पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित होने वाली सबसे बड़ी परीक्षा है।
सरकार का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित करने की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इसे चरणबद्ध तरीके से (Computer Based NEET) CBT मोड में लाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
शुरुआती मॉडल JEE की तरह दो चरणों वाला हो सकता है।
NTA में बड़े सुधार, सुरक्षा होगी और मजबूत
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर बदलाव किए गए हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परिणाम घोषित होने तक हर चरण के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
सुरक्षा कारणों से इन व्यवस्थाओं का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सरकार के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों को सुरक्षित और अलग-थलग परिसर में रखा जाता है, जहां किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की अनुमति नहीं होती। प्रश्नों का एक बड़ा बैंक तैयार किया जाता है, जिसमें वास्तविक परीक्षा से कई गुना अधिक प्रश्न शामिल रहते हैं। इसी बैंक से अंतिम प्रश्नपत्र तैयार किया जाता है, ताकि किसी एक व्यक्ति को पूरे पेपर की जानकारी न हो।
AI से होगा 13 भाषाओं में अनुवाद
हलफनामे में बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से प्रश्नपत्रों का 13 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जाता है।
साथ ही प्रश्नपत्र के कई सेट तैयार रखे जाते हैं ताकि किसी भी सुरक्षा खतरे की स्थिति में वैकल्पिक सेट तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।
GPS ट्रंक, QR कोड और बायोमेट्रिक सुरक्षा
प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग, पैकिंग और परिवहन के लिए भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। पेपर को टैम्पर-प्रूफ पैकेजिंग, यूनिक QR कोड, GPS युक्त स्टील ट्रंक और वन-टाइम लॉक में सुरक्षित रखा जाता है।
परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों का फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन और पहचान सत्यापन किया जाता है तथा हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर से जांच भी अनिवार्य होती है।
दो बड़े फैसले
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण कदम (NTA Reforms ) उठाए गए हैं—- ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026’ लागू किया गया है, जिसमें पेपर लीक, इम्पर्सनेशन और डिजिटल छेड़छाड़ जैसे अपराधों पर कड़ी सजा तथा फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान किया गया है।
– 27 जून 2026 को हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। यह समिति NTA की परीक्षा प्रणाली की समीक्षा कर तीन माह के भीतर सुधार संबंधी सिफारिशें देगी।
छात्रों पर क्या होगा असर?
यदि सरकार भविष्य में NEET को JEE की तरह दो चरणों में और कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने का निर्णय लेती है, तो इससे परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित हो सकती है।
हालांकि फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और छात्रों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
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