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काले रंग की एक पेंटिंग ने बचाईं चीलों की जान, पवन चक्कियों से 72% तक घटी पक्षियों की मौत

नॉर्वे के वैज्ञानिकों का अनोखा प्रयोग, एक ब्लेड को काला रंगने से वन्यजीव संरक्षण की नई उम्मीद

EduTech Bharat | Science & Environment News

स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) को बढ़ावा देने में पवन ऊर्जा (Wind Energy) की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन विशाल पवन टर्बाइनों (Wind Turbines) से हर साल हजारों पक्षियों की मौत भी होती है। अब नॉर्वे के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सरल, सस्ता और प्रभावी उपाय खोज निकाला है, जिससे पक्षियों की टक्कर से होने वाली मौतों में करीब 72 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।

शोधकर्ताओं ने पवन टर्बाइन के तीन ब्लेड में से केवल एक ब्लेड को काले रंग से पेंट किया। कई वर्षों तक किए गए अध्ययन में यह पाया गया कि इस छोटे से बदलाव ने पक्षियों को घूमते हुए ब्लेड स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे, जिससे वे समय रहते दिशा बदल सके।

क्यों होती हैं पक्षियों की मौत?

यह अध्ययन नॉर्वे के स्मोला (Smøla) द्वीप पर किया गया, जहां बड़ी संख्या में व्हाइट-टेल्ड ईगल (White-tailed Eagle) यानी समुद्री चील पाई जाती हैं।   इसलिए इसे नार्वे रिसर्च ( Norway Research) भी कहा जाता है। 

वैज्ञानिकों के अनुसार, तेज गति से घूमते सफेद ब्लेड पक्षियों की आंखों को धुंधले दिखाई देते हैं। इस प्रभाव को ‘मोशन स्मियर (Motion Smear)’ कहा जाता है। इसी कारण पक्षी ब्लेड की सही स्थिति का अनुमान नहीं लगा पाते और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

एक ब्लेड काला, परिणाम चौंकाने वाले

शोध के दौरान कुछ पवन टर्बाइनों के केवल एक-एक ब्लेड को काले रंग से रंगा गया। इसके बाद कई वर्षों तक पक्षियों की गतिविधियों और दुर्घटनाओं पर निगरानी रखी गई।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष:

पक्षियों की टक्कर से होने वाली मौतों में करीब 72% की कमी।

जिन टर्बाइनों के ब्लेड रंगे गए, उनके नीचे एक भी व्हाइट-टेल्ड ईगल की मौत दर्ज नहीं हुई।

यह उपाय बेहद कम लागत वाला और आसानी से लागू किया जा सकता है।

दुनिया भर में हो रहा परीक्षण

वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह प्रयोग केवल एक स्थान तक सीमित रहा है। इसलिए स्वीडन, नीदरलैंड और अमेरिका सहित कई देशों में भी इस तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है।

यदि अन्य देशों में भी ऐसे ही परिणाम मिलते हैं, तो भविष्य में दुनिया भर के पवन ऊर्जा संयंत्रों में इस तकनीक को अपनाया जा सकता है। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और वन्यजीव संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी।

क्यों है यह शोध महत्वपूर्ण?

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दुनिया तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर बढ़ रही है। ऐसे में यह शोध साबित करता है कि छोटे तकनीकी बदलाव भी बड़े पर्यावरणीय परिणाम दे सकते हैं।

एक साधारण काले रंग की पेंटिंग न केवल हजारों पक्षियों की जान बचा सकती है, बल्कि यह भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के लिए भी नई दिशा दिखाती है।