शिक्षण संस्थानों का नैक मूल्यांकन नियम बदला, अब 12 श्रेणियां होंगी

जीआइएन, लखनऊ : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए नया नैक मूल्यांकन सिस्टम तैयार किया है। इसमें अब शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन 12 श्रेणियों के आधार पर किया जाएगा। नैक मूल्यांकन शुल्क भी तीन लाख रुपये से घटाकर सवा लाख रुपये करने की तैयारी है। इसके अलावा अनुदानित और निजी महाविद्यालयों के अर्हता अंक भी केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के 55 और 45 प्रतिशत के मुकाबले घटाकर 40 प्रतिशत ही होंगे।

Prof. Anup Kumar Singh

शिक्षा मंत्रालय की स्वायत्त संस्था नैक ( नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडेशन काैंसिल ) ने नैक मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार के लिए राधाकृष्णन कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने नैक मूल्यांकन की पूर्व प्रक्रिया में मौजूद गड़बड़ियों को दूर करने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। कमेटी का गठन पिछले सालों के दौरान नैक मूल्यांकन को लेकर उठे सवालों और गड़बड़ियों ( जिसमें रिश्वत के मामले भी शामिल हैं ) के सामने आने के बाद किया गया था। मूल्यांकन को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कमेटी ने जो सुझाव दिए हैं। उनकी भी समीक्षा नैक मूल्यांकन बोर्ड एक उच्च स्तरीय समिति ने की है। इस समिति में उत्तर प्रदेश से इकलौते सदस्य प्रो. अनूप कुमार सिंह हैं जो कानपुर में पीपीएन पीजी कालेज के प्राचार्य हैं। उनके अलावा हाई पावर कमेटी में आइआइटी मद्रास के निदेशक, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बेंगलुरू , देवी अहिल्याबाई यूनिवर्सिटी इंदौर, दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और महाविद्यालयों के प्राचार्य शामिल हैं। समिति ने राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों का अध्ययन कर लिया है। हाई पावर कमेटी ने अब नैक मूल्यांकन प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव का निर्णय किया है। इन बदलावों को दिसंबर 2025 में लागू किया जा सकता है।

हाईपावर कमेटी के सदस्य प्रो. अनूप कुमार सिंह ने बताया कि नैक मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए नैक मूल्यांकन की 12 नई श्रेणियां बनाई जा रही हैं। इससे आइआइटी जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों और छोटे शहरों के शिक्षण संस्थानों के संसाधन, शैक्षिक लक्ष्य को विभाजित किया जा सकेगा। अलग -अलग मानक स्तर निर्धारित किए जाने से छोटे शहरों के शिक्षण संस्थान भी क्रमिक विकास यात्रा में शामिल हो सकेंगे। इसके तहत शिक्षण संस्थानों के अर्हता अंक भी राष्ट्रीय व राज्य विश्वविद्यालयों के मुकाबले में कम किए गए हैं। निजी व अनुदानित महाविद्यालयों को नैक मूल्यांकन में शामिल होने के लिए केवल 40 प्रतिशत अर्हता अंक हासिल करने होंगे जबकि राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों के लिए 45 और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए अर्हता अंक 55 होगा। महाविद्यालयों को अब नैक मूल्यांकित अथवा अमूल्यांकित श्रेणी (‘एक्रेडिटेड’, या ‘नाट एक्रेडिटेड’ ) में ही रखा जाएगा। मूल्यांकन शुल्क भी तीन लाख से घटाकर सवा लाख रुपया किया जा रहा है जिससे छोटे शिक्षण संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन को प्रभावी बनाया जा रहा है। अब कोई भी नैक टीम किसी शिक्षण संस्थान का निरीक्षण करने नहीं जाएगी। इसके विपरीत नैक मान्यता के समर्थन में सभी जरूरी दस्तावेज की प्रमाणित प्रतियां ही जमा होंगी। डिजिटल प्रमाणित ( जियो टैग ) अभिलेखों के आधार पर मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। भौतिक सत्यापन के लिए अब नैक के असेसर्स किसी भी शिक्षण संस्थान में नहीं जाएंगे। यह जिम्मेदारी भी सरकारी एजेंसियों को दी जा रही है।

श्रेणियां में जिनमें अलग -अलग होगा मूल्यांकन
मैनेजमेंट कालेज, ला कालेज, राज्य व केंद्रीय विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय महत्व के शिक्षण संस्थान, संबद्ध महाविद्यालय, स्वायत्त महाविद्यालय, कांस्टीट्यएट महाविद्यालय , रिसर्च यूनिवर्सिटी, ग्रामीण एवं दूरस्थ कालेज, मल्टीडिस्पलनरी कालेज या विश्वविद्यालय और कौशल विश्वविद्यालय ।

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