नंदन नीलेकणि ने दिया विशाल प्रश्न बैंक (Question Bank) बनाने का सुझाव, कंप्यूटर आधारित परीक्षा (Computer-Based Testing) के केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाने पर जोर
नीट-यूजी (NEET-UG) में पेपर लीक रोकने के लिए नंदन नीलेकणि ने विशाल प्रश्न बैंक (Question Bank), कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) और परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाने का सुझाव दिया।
नई दिल्ली (Edutechbharat. Com)। मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में प्रश्नपत्र लीक (Paper Leak) और गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए परीक्षा प्रणाली (Examination System) में बड़े बदलाव की तैयारी है। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने सुझाव दिया है कि परीक्षा के लिए पहले से एक निश्चित प्रश्नपत्र तैयार करने के बजाय प्रश्नों का विशाल बैंक (Question Bank) बनाया जाए। परीक्षा वाले दिन अंतिम समय में इसी बैंक से प्रश्नों का चयन करके प्रश्नपत्र तैयार किया जाए। इससे प्रश्नपत्र पहले से हासिल करके बेचने के आर्थिक प्रलोभन को कम करने में मदद मिल सकती है।
नीलकणि ने 13 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम (Bloomberg New Economy Forum) में परीक्षा सुधारों (Exam Reforms) पर चर्चा के दौरान यह सुझाव दिया। वह केंद्र सरकार की ओर से गठित उच्चस्तरीय परीक्षा सुधार कार्यबल (High-Level Exam Reform Task Force) के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या को उसके मूल कारणों तक पहुंचकर और तकनीक के इस्तेमाल से हल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समिति के सुझावों को लागू करने के लिए उत्सुक हैं। हालांकि, इन सुझावों पर अंतिम निर्णय और इन्हें लागू करने की समयसीमा अभी घोषित नहीं हुई है।
प्रश्नपत्र की जगह होगा प्रश्नों का विशाल बैंक
नीलकणि के मुताबिक, परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र तैयार होने पर उसे हासिल करने और बेचने के लिए आर्थिक प्रलोभन पैदा होता है। इसे रोकने के लिए प्रश्नों का एक बड़ा और सुरक्षित बैंक तैयार किया जा सकता है। परीक्षा के निर्धारित समय से ठीक पहले इसी बैंक से प्रश्नों का चयन करके उस दिन का प्रश्नपत्र बनाया जाए।
इस व्यवस्था में हर परीक्षा के लिए प्रश्नों का चयन अंतिम समय में होगा। इससे किसी एक निश्चित प्रश्नपत्र को पहले से हासिल करने की आशंका कम हो सकती है। कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence—AI) की मदद से भी प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, केवल प्रश्नपत्र को अंतिम समय में तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रश्नों की कठिनाई का स्तर (Difficulty Level), पाठ्यक्रम के सभी हिस्सों का संतुलित प्रतिनिधित्व, अलग-अलग प्रश्नपत्रों के अंकों की तुलनीयता और उत्तरों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। इसके लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था और विशेषज्ञों की निगरानी की आवश्यकता होगी।
कंप्यूटर पर होगी परीक्षा, बढ़ाने होंगे केंद्र
नीलकणि ने सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली (Computer-Based Testing—CBT) की ओर ले जाने पर भी जोर दिया है। उनके अनुसार, देश में करीब 1.50 लाख ऐसे स्थान हैं, जहां विद्यार्थी परीक्षा दे सकते हैं। इस नेटवर्क को और विस्तृत करने की आवश्यकता है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा में प्रश्नपत्रों के डिजिटल वितरण (Digital Distribution), परीक्षा केंद्रों की निगरानी (Exam Centre Monitoring) और उत्तरों के मूल्यांकन (Evaluation) की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे प्रश्नपत्रों की छपाई, पैकिंग, परिवहन और विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, नीट जैसी देशव्यापी परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाने के लिए पर्याप्त कंप्यूटर, सुरक्षित इंटरनेट कनेक्टिविटी (Internet Connectivity), बिजली की निर्बाध उपलब्धता, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होगी। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में अतिरिक्त परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखना होगा।
पेपर लीक के बाद तेज हुई परीक्षा सुधारों की प्रक्रिया
नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) की परीक्षा तीन मई को आयोजित की गई थी। इसके प्रश्नपत्र से संबंधित सामग्री के कथित अनधिकृत प्रसार की शिकायत के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation—CBI) ने 12 मई को मामला दर्ज किया था। इसके बाद परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और सुरक्षा को लेकर व्यापक सवाल उठे। परीक्षा दोबारा 21 जून को आयोजित की गई थी।
केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उच्चस्तरीय कार्यबल गठित किया। नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाला यह कार्यबल प्रश्नपत्रों की सुरक्षा (Question Paper Security), परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल जैसे विषयों पर विचार कर रहा है।
नीलकणि ने बताया कि समिति ने करीब 18 बैठकें की हैं और विभिन्न पक्षों के साथ लगभग 40 परामर्श बैठकें आयोजित की हैं। विद्यार्थियों, अभिभावकों, छात्र संगठनों, चिकित्सकों के संगठनों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं सहित विभिन्न पक्षों से 50 हजार से अधिक सुझाव मिले हैं। समिति को गठन के तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देनी हैं।
एनटीए की व्यवस्था में भी हो सकते हैं बदलाव
नीट-यूजी का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (National Testing Agency—NTA) करती है। परीक्षा की पारदर्शिता (Transparency) बनाए रखने के लिए एजेंसी को प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित करने, निगरानी करने और परिणाम जारी करने तक कई स्तरों पर काम करना होता है।
नई व्यवस्था में प्रश्न बैंक की सुरक्षा, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Audit Trail), सीमित और नियंत्रित पहुंच तथा परीक्षा केंद्रों की तकनीकी क्षमता जैसे विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू होने की स्थिति में एजेंसी को प्रश्नपत्रों के सुरक्षित वितरण और परीक्षा के दौरान तकनीकी गड़बड़ी से निपटने की भी व्यवस्था करनी होगी।
परीक्षा प्रणाली में बदलाव का उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा। इसके लिए तकनीकी सुरक्षा के साथ मानवीय निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी होगी।
विद्यार्थियों के लिए क्या बदलेगा?
यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है और इन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भविष्य में नीट के अभ्यर्थियों को परीक्षा देने के तरीके में बदलाव देखने को मिल सकता है। संभावित बदलावों में शामिल हैं—
- प्रश्नपत्र की सुरक्षा (Question Paper Security): परीक्षा वाले दिन प्रश्नपत्र तैयार होने से पहले से पेपर हासिल करने का जोखिम कम हो सकता है।
- डिजिटल परीक्षा (Digital Examination): अभ्यर्थियों को कंप्यूटर पर प्रश्न हल करने का अभ्यास करना पड़ सकता है।
- परीक्षा केंद्रों का विस्तार (Exam Centre Expansion): अधिक स्थानों पर परीक्षा की सुविधा मिलने से मौजूदा केंद्रों पर दबाव कम किया जा सकता है।
- प्रश्नों का संतुलित चयन (Balanced Question Selection): विशाल प्रश्न बैंक के जरिए अलग-अलग प्रश्नपत्रों में कठिनाई का स्तर समान रखने की व्यवस्था विकसित करनी होगी।
- पारदर्शी मूल्यांकन (Transparent Evaluation): प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा आयोजित करने और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने की जरूरत होगी।
फिलहाल इन बदलावों को प्रस्तावित सुधारों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की ओर से भविष्य की नीट परीक्षा के लिए पूरी तरह कंप्यूटर आधारित प्रारूप, अंतिम समय में प्रश्नपत्र तैयार करने की व्यवस्था या नई परीक्षा प्रणाली लागू करने की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी में जरूरी बदलाव करने चाहिए।
तकनीक से बहाल हो सकता है परीक्षा पर भरोसा
नीट में शामिल होने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए परीक्षा केवल प्रवेश का माध्यम नहीं, बल्कि उनके वर्षों के परिश्रम और भविष्य से जुड़ा अवसर है। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं न केवल परीक्षा की निष्पक्षता (Fairness) पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा भी प्रभावित करती हैं।
नीलकणि का प्रस्ताव परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को तकनीक के माध्यम से दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लेकिन इसकी सफलता केवल कंप्यूटर या कृत्रिम मेधा (AI) के इस्तेमाल से तय नहीं होगी। सुरक्षित प्रश्न बैंक, निष्पक्ष मूल्यांकन, मजबूत परीक्षा केंद्र, स्वतंत्र निगरानी और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी होगी।
समिति की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसलों से तय होगा कि नीट सहित दूसरी राष्ट्रीय परीक्षाओं की व्यवस्था किस रूप में बदलेगी।
स्रोत: नंदन नीलेकणि की 13 अक्टूबर 2026 की टिप्पणी, ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम (Bloomberg New Economy Forum); संबंधित समाचार रिपोर्ट और आधिकारिक परीक्षा संबंधी विवरण।
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