-14°C बाहर, अंदर 15°C: सोनम वांगचुक का सोलर टेंट बना हिमालयी क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद
नई दिल्ली/लेह। क्या बिना हीटर और केरोसिन के कोई टेंट बर्फीली रातों में भी गर्म रह सकता है? इसका जवाब है—हाँ। लद्दाख के प्रसिद्ध नवप्रवर्तक Sonam Wangchuk ने ऐसा Made-in-Ladakh Solar Heated Tent विकसित किया है, जो सूर्य की ऊर्जा और विशेष इन्सुलेशन तकनीक की मदद से भीषण ठंड में भी अंदर का तापमान आरामदायक बनाए रखता है।
नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक चली लंबी भूख हड़ताल के कारण चर्चा में रहे सोनम वांगचुक के अनुसार, वर्ष 2021 में किए गए परीक्षण के दौरान रात 10 बजे जब बाहर का तापमान -14 डिग्री सेल्सियस था, तब टेंट के अंदर तापमान 15 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह उपलब्धि बिना पारंपरिक हीटिंग सिस्टम के हासिल की गई।

कैसे काम करता है यह सोलर टेंट?
इस टेंट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी Passive Solar Heating Technology है।
टेंट का दक्षिण दिशा की ओर बना पॉलीकार्बोनेट चैंबर सूर्य की रोशनी को अंदर आने देता है।
यह चैंबर ग्रीनहाउस प्रभाव की तरह गर्मी को अंदर कैद कर लेता है।

उत्तर दिशा में बना स्लीपिंग एरिया विशेष इन्सुलेशन से घिरा है, जिससे गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है।
बाहरी ठंडी हवाओं को रोकने के लिए विंड-प्रूफ कवर लगाया गया है।
गोलाकार डिजाइन सतह क्षेत्र कम करता है, जिससे हीट लॉस भी घटता है।
दिन के समय टेंट में एक Solar Lounge भी उपलब्ध रहता है, जहां बैठकर प्राकृतिक गर्माहट का लाभ लिया जा सकता है।
10 लोगों के रहने की क्षमता
यह पोर्टेबल टेंट एक बार में 10 लोगों को आश्रय दे सकता है। इसे अलग-अलग हिस्सों में खोलकर आसानी से पहाड़ी इलाकों तक ले जाया जा सकता है। वांगचुक के अनुसार, प्रत्येक हिस्से का वजन 30 किलोग्राम से कम है, जबकि हल्के एल्युमिनियम संस्करण में प्रत्येक भाग 20 किलोग्राम से भी कम वजन का है।

केरोसिन पर निर्भरता होगी कम
ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में गर्मी के लिए बड़ी मात्रा में केरोसिन का उपयोग किया जाता है, जिससे प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। यह सोलर टेंट सूर्य की ऊर्जा का उपयोग कर ईंधन की जरूरत कम करता है और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प प्रस्तुत करता है।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक भारत के जाने-माने शिक्षा सुधारक, इंजीनियर और सामाजिक नवप्रवर्तक हैं। उन्होंने लद्दाख में शिक्षा सुधार के लिए SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की और बाद में जल संकट से निपटने के लिए प्रसिद्ध Ice Stupa तकनीक विकसित की। उन्हें Ramon Magsaysay Award Foundation के Ramon Magsaysay Award, UNESCO के Global Award for Sustainable Architecture सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।

Edutechbharat View
सोनम वांगचुक का यह सोलर टेंट केवल एक आवासीय समाधान नहीं, बल्कि ग्रीन इंजीनियरिंग, क्लाइमेट इनोवेशन और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दिखाता है कि स्थानीय परिस्थितियों को समझकर विकसित की गई तकनीक वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान बन सकती है।






