Dirac Medal पाने वाले Prof. Deepak Dhar ने पूर्ववर्ती विज्ञानियों Meghnad Saha; SN Sen को क्यों बताया महान 

Education Desk  : सैद्धांतिक भौतिकी (TheoreticalPhysics) के सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में से एक, 2026 आईसीटीपी डिराक मेडल (ICTP Dirac Medal) से सम्मानित किए जाने वाले प्रो. दीपक धर ने अपने से पूर्ववर्ती भारतीय विज्ञानियों मेघनाद साहा, एसएन सेन को महान बताते हुए कहा कि उनके समय में मेडल की परंपरा कमजोर थी। वरना उनका काम हम जैसे विज्ञानियों से कहीं  ज्यादा महत्वपूर्ण है। वह महान विज्ञानी थे।

 सोशल मीडिया पर वायरल उनकी इस प्रतिक्रिया को लोगों की बड़ी सराहना मिल रही है। लोग इसे उनके व्यक्त्तित्व की सरलता और सहजता का हिस्सा बता रहे हैं। लोगों का का कहना है कि उन्होंने हिंदी माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर शिखर की यात्रा की लेकिन अहंकार से कोसों दूर हैं।

पुरस्कार देने वाली समिति ने भी कहा कि दीपक धर ने दर्शाया कि कैसे सरल परस्पर क्रियाएँ(simpleinteractions)बड़ी प्रणालियों में जटिल और कभी-कभी अप्रत्याशित व्यवहार (unpredictablebehaviour) को जन्म दे सकती हैं। इनके शोध का उपयोग केवल भौतिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि जीव विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, न्यूरोसाइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों में भी किया जा रहा है।

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एजूकेशन एंड रिसर्च, पुणे #IISERPune जहां वह 2016 से 2024 तक जुड़े रहे और ‘डिस्टिंग्विशड विजिटिंग प्रोफेसर'(DistinguishedVisitingProfessor) और ‘डिस्टिंग्विशड प्रोफेसर एमेरिटस'(DistinguishedProfessorEmeritus) के पद पर काम किया। संस्थान ने अपने संदेश में कहा कि इस दौरान उन्होंने संस्थान के शैक्षणिक और बौद्धिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें यह पुरस्कार पाने के लिए हार्दिक बधाई! प्रो. धर ने यह पुरस्कार तीन अन्य भौतिकविदों—बर्नार्डडेरिडा (कॉलेज डी फ्रांस, फ्रांस), मार्क मेज़ार्ड(बोकोनी यूनिवर्सिटी, इटली), और हैमसोम्पोलिंस्की (हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम, इज़राइल एवं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए) के साथ साझा किया है।

​वर्ष 2026 का डिराक मेडल प्रो. धर को मिले असाधारण सम्मानों की सूची में एक और उपलब्धि जोड़ता है, जिसमें पद्म भूषण (2023), बोल्टज़मैन मेडल (2022), और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (1991) शामिल हैं। वह भारतीय विज्ञान अकादमी (IAS), भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA), राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत (NASI), और द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज (TWAS) के निर्वाचित फेलो भी हैं।

 सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में डिरैक मेडल (DiracMedal) दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। इटली स्थित ‘इंटरनेशनल सेंटर फारथ्योरेटिकलफिजिक्स'(ICTP) द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान प्रोफेसर दीपक धर को सांख्यिकीय यांत्रिकी (StatisticalMechanics) और जटिल प्रणालियों (ComplexSystems) के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए दिया जा रहा है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय और आइआइटी कानपुर के छात्र रहे देश के प्रख्यात भौतिक विज्ञानी प्रो. दीपक धर का मूल निवास उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में है। 1951 में जन्में प्रो. धर ने वर्ष 1970 में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई की थी। भारत सरकार ने वर्ष 2023 में विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। इन दिनों वह बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज में इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के विशिष्ट प्रोफेसर हैं। उन्हें इससे पहले वर्ष 2022 में दुनिया का प्रतिष्ठित बोल्टजमैन पदक भी दिया गया है। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय हैं जबकि डिरैक मेडल पाने वाले दूसरे हैं। इससे पहले वर्ष 2012 में डिरैक मेडल भारत के  प्रसिद्ध स्ट्रिंग थ्योरिस्ट प्रोफेसर अशोक सेन को दिया जा चुका है। 

यह मेडल इटली स्थित अब्दुस सलाम इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स की ओर से 1985 में शुरू किया गया है। यह पुरस्कार सैद्धांतिक भौतिकी में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले विज्ञानियों को दिया जाता है। इसके तहत प्रो. धर को डिराक मेडल के साथ प्रो धर को 5000 अमेरिकी डॉलर (4.76 लाख रुपये) की पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाएगी। 

प्रो. धर का विशेष योगदान 

सैंडपाइल मॉडल (AbelianSandpileModel): प्रो. धर को उनके ‘अबेलियनसैंडपाइलमॉडल’ के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इस मॉडल के माध्यम से उन्होंने यह समझाया कि कैसे किसी प्रणाली में छोटे-छोटे बदलाव अचानक बड़े पैमाने पर भूस्खलन, भूकंप, ट्रैफिक जाम या वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जैसे अप्रत्याशित परिणाम पैदा कर सकते हैं।
प्रो. दीपक धर: एक दृष्टि में

जन्म एवं शिक्षा 

 जन्म 1951 (प्रतापगढ़, यूपी)। 

इलाहाबाद विश्वविद्यालय और IIT कानपुर से शिक्षा के बाद कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) से पीएचडी। 

महान वैज्ञानिकों के साथ काम 

Caltech में उन्होंने महान भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फेनमैन के साथ टीचिंग असिस्टेंट के रूप में काम किया। 

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