1788803524041

​अमरावती/गन्नवरम : भारत ने क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। आंध्र प्रदेश सरकार के ‘अमरावती क्वांटम वैली’ (Amaravati Quantum Valley) कार्यक्रम के तहत भारतीय शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और छात्रों की एक समर्पित टीम ने देश का पहला स्वदेशी ‘क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी’ (AQRF) तैयार कर लिया है।

​विश्व क्वांटम दिवस (14 अप्रैल) के अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एसआरएम यूनिवर्सिटी (SRM University-AP) और गन्नवरम स्थित मेधा टावर्स (Medha Towers) में स्थापित इन परीक्षण सुविधाओं का औपचारिक उद्घाटन किया।

​1. मुख्य तकनीकी विशेषताएं : -270°C का तापमान और स्वदेशी निर्माण

​अति-शीतल वातावरण (Cryogenics): क्वांटम कंप्यूटर के प्रोसेसर केवल -269°C से -270°C (लगभग 0 Kelvin) के अति-ठंडे तापमान पर ही काम कर पाते हैं। अमरावती प्रोजेक्ट के तहत ‘डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर’ (Dilution Refrigerator) का लाइव प्रदर्शन कर प्रोसेसर कूलिंग प्रक्रिया को सफलतापूर्वक चालू करके दिखाया गया।

​80% स्वदेशी उपकरण

इस पूरे क्वांटम इकोसिस्टम को असेंबल करने में इस्तेमाल किए गए लगभग 80 से 85 प्रतिशत उपकरण देश के विभिन्न संस्थानों (जैसे TIFR, IISc आदि) की मदद से भारत में ही निर्मित और जुटाए गए हैं।

​’Amaravati 1S’ और ‘Amaravati 1Q’

​Amaravati 1S: एसआरएम यूनिवर्सिटी में स्थापित यह प्रणाली एक ‘ओपन-एक्सेस’ मॉडल है, जिससे छात्र और शोधकर्ता सीधे हार्डवेयर के काम करने के तरीके को देख और समझ सकते हैं। ​

Amaravati 1Q: मेधा टावर्स (गन्नवरम) में स्थापित यह सिस्टम रियल-टाइम टेस्टिंग और एडवांस्ड रिसर्च के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

​2. ‘ब्लैक बॉक्स’ संस्कृति और विदेशी निर्भरता पर चोट​

अब तक अमेरिका, चीन और यूरोपीय देशों के पास ही इस तरह के सुपरकंडक्टिंग क्वांटम हार्डवेयर बनाने की क्षमता थी। विदेशी कंपनियां भारतीय शोधकर्ताओं को केवल सॉफ्टवेयर या क्लाउड एक्सेस देती थीं और हार्डवेयर को एक सीक्रेट “ब्लैक बॉक्स” की तरह बंद रखती थीं, जिससे अंदरूनी डिजाइन को समझना असंभव था।​अमरावती क्वांटम फैसिलिटी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसने इस “ब्लैक बॉक्स” की निर्भरता को खत्म कर दिया है। भारत के पास अब अपना ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ शोधकर्ता क्वांटम चिप्स, एल्गोरिदम और अन्य कंपोनेंट्स की खुद जांच और सर्टिफिकेशन कर सकते हैं।

​यह एडवांसमेंट भारत को आगे कैसे ले जाएगा?

​यह स्वदेशी तकनीकी उपलब्धि भारत के तकनीकी, आर्थिक और रणनीतिक परिदृश्य को निम्नलिखित तरीकों से बदलेगी।

तकनीकी संप्रभुता (Tech Sovereignty)

क्वांटम तकनीक आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति संतुलन तय करेगी। खुद का हार्डवेयर और टेस्टिंग बेड होने से भारत को अब किसी अन्य देश की पाबंदियों या शर्तों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।​

ग्लोबल क्वांटम हब और मेक इन इंडिया (Make in India)

भारत अब केवल क्वांटम सॉफ्टवेयर का उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि क्वांटम हार्डवेयर पार्ट्स, सुपरकंडक्टिंग सर्किट्स और प्रिसिजन इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण और निर्यात (Export) कर सकेगा।​

साइबर और राष्ट्रीय सुरक्षा

भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर पारंपरिक ऑनलाइन सुरक्षा एनक्रिप्शन (Encryption) को आसानी से तोड़ सकते हैं। स्वदेशी हार्डवेयर से भारत अपने रक्षा संचार, बैंकिंग प्रणाली और सरकारी डेटा के लिए ‘क्वांटम-सुरक्षित’ (Quantum-Safe) नेटवर्क तैयार कर सकेगा।​

फार्मा और कैंसर रिसर्च में क्रांतिकारी बदलाव

जटिल आणविक संरचनाओं (Molecular Structures) का सिमुलेशन जो सामान्य सुपरकंप्यूटर से करने में सालों लगते हैं, वे क्वांटम कंप्यूटर से मिनटों में हो जाएंगे। इससे नई जीवनरक्षक दवाओं और टीकों की खोज बहुत तेजी से हो सकेगी।

​अर्धचालक (Semiconductor) और AI में बढ़त

क्वांटम प्रोसेसिंग के लिए विकसित की जाने वाली क्रायोजेनिक और प्रिसिजन तकनीकों का सीधा लाभ भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण (Chip Manufacturing) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इकोसिस्टम को मिलेगा।