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ट्रांसमिशन लाइनों में कैस्केडिंग फेलियर का खतरा होगा कम

कानपुर। हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के टावरों को तार टूटने की स्थिति में ढहने से बचाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने एक नया लोड-लिमिटिंग डिवाइस विकसित किया है। यह उपकरण बिजली के सस्पेंशन टावर और कंडक्टर के बीच अचानक उत्पन्न होने वाले अत्यधिक भार को सीमित कर टावर को संरचनात्मक नुकसान से बचाता है। इस तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट आवेदन (IPA No. 202511038820) भी दाखिल किया जा चुका है।

डॉ चिन्मय कोले

शोधकर्ताओं के अनुसार, हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन नेटवर्क में किसी एक स्थान पर टावर के क्षतिग्रस्त होने से कई टावरों के एक के बाद एक गिरने का खतरा रहता है। इस तरह की स्थिति को कैस्केडिंग फेलियर कहा जाता है। नया उपकरण इसी खतरे को कम करने के लिए विकसित किया गया है।

तार टूटने पर कई गुना बढ़ जाता है भार

सस्पेंशन टावर सामान्य परिस्थितियों में कंडक्टर और इंसुलेटर के भार को संभालते हैं। लेकिन आंधी-तूफान, दुर्घटना या अन्य कारणों से यदि टावर के एक तरफ का कंडक्टर अचानक टूट जाता है तो संतुलन बिगड़ जाता है। इससे पैदा होने वाला गतिक प्रभाव बल सामान्य शुरुआती तनाव से करीब दो से तीन गुना तक अधिक हो सकता है।

डॉक्टर चिन्मय कोले डिवाइस को दिखाते हुए

शोध के अनुसार, लागत और व्यावहारिक सीमाओं के कारण ट्रांसमिशन टावरों को ऐसे अत्यधिक पीक लोड को सहने के लिए डिजाइन करना आर्थिक रूप से उचित नहीं होता। परिणामस्वरूप एक टावर के विफल होने के बाद उसके आसपास के टावर भी प्रभावित हो सकते हैं और पूरी ट्रांसमिशन लाइन में बड़ा व्यवधान पैदा हो सकता है।

‘मैकेनिकल फ्यूज’ की तरह करेगा काम

आईआईटी कानपुर का नया उपकरण टावर के क्रॉस-आर्म और इंसुलेटर के बीच लगाया जाता है। सामान्य स्थिति में यह एक मजबूत लिंक की तरह काम करता है और कंडक्टर का सामान्य भार संभालता है।

आईआईटी में तैयार डिवाइस का एक हिस्सा

तेज हवा चलने पर इसमें लगा पिन सपोर्ट को हवा की दिशा में सीमित रूप से घूमने की सुविधा देता है। इससे हवा के कारण संरचना पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को कम करने में मदद मिलती है।

सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कंडक्टर टूटने की स्थिति में सामने आती है। तार टूटते ही अचानक उत्पन्न होने वाला अत्यधिक भार डिवाइस के ट्रिगर मैकेनिज्म को सक्रिय करता है। इसके बाद उपकरण के भीतर लगी विशेष हेलिकल स्टील कॉइल खुलकर लगभग दो से तीन मीटर तक फैलती है। कॉइल का यह फैलाव अचानक उत्पन्न ऊर्जा को सोखता है और टावर तक पहुंचने वाले बल को उसकी सुरक्षित भार क्षमता के भीतर सीमित करने में मदद करता है।

टावर बचा तो मरम्मत भी होगी आसान

इस तकनीक की खासियत यह है कि दुर्घटना की स्थिति में पूरे ट्रांसमिशन टावर को बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि लोड-लिमिटिंग डिवाइस सक्रिय हो जाता है तो क्षतिग्रस्त हिस्से के रूप में मुख्य रूप से इसी उपकरण को बदला जा सकता है। इससे टावर के पुनर्निर्माण की तुलना में मरम्मत का खर्च कम होगा और बिजली आपूर्ति बहाल करने में लगने वाला समय भी घट सकता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह व्यवस्था बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क की विश्वसनीयता और लचीलापन बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है।

पुरानी और नई दोनों ट्रांसमिशन लाइनों में संभव उपयोग

डिवाइस को मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों में लगाने के साथ-साथ नई परियोजनाओं में भी शामिल किया जा सकता है। अलग-अलग प्रकार के टावरों और संरचनात्मक जरूरतों के अनुसार इसके डिजाइन में बदलाव किया जा सकता है। कम लागत में सुरक्षा बढ़ाने के कारण इसका इस्तेमाल बड़े बिजली बुनियादी ढांचे में किया जा सकता है।

प्रयोगशाला में हो चुका परीक्षण

शोध टीम ने इस तकनीक के 3डी-प्रिंटेड मॉडल, स्टील कॉइल के फुल-स्केल प्रोटोटाइप और कंप्यूटर सिमुलेशन के माध्यम से परीक्षण किए हैं। तकनीक का तकनीकी तत्परता स्तर (TRL) 6 बताया गया है। अब शोधकर्ता इसके अगले चरण में औद्योगिक साझेदारों के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्तर पर फील्ड ट्रायल और व्यावसायिक उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।

आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग का आविष्कार

इस तकनीक को आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. चिन्मय कोले और पीएचडी शोधार्थी हिरण्मय काकोति ने विकसित किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह उपकरण ट्रांसमिशन टावरों को अप्रत्याशित अत्यधिक भार से बचाने के साथ-साथ बिजली ग्रिड में बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान और लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

शोध छात्र हिरण्यमय में काकोति

एक नजर में तकनीक-

तकनीक: सस्पेंशन टावरों के लिए लोड-लिमिटिंग डिवाइस

– पेटेंट आवेदन: IPA No. 202511038820

– उपयोग: हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन के सस्पेंशन टावर

– काम: अचानक बढ़ने वाले भार को सीमित करना और ऊर्जा को सोखना

– विशेष व्यवस्था: हेलिकल स्टील कॉइल

– कॉइल का फैलाव: लगभग दो से तीन मीटर

– मुख्य लाभ: टावर को ढहने से बचाना और कैस्केडिंग फेलियर का खतरा घटाना

– तकनीकी तत्परता स्तर: TRL-6

– आविष्कारक: डॉ. चिन्मय कोले और हिरण्मय काकोति

– अगला चरण: औद्योगिक सहयोग और फील्ड ट्रायल