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AI और Critical Thinking पर नए शोध में 22 प्रतिभागियों, 68.25% औसत स्कोर, Cognitive Offloading और AI पर निर्भरता के बीच संबंधों को समझें।

नई दिल्ली / टेक डेस्क | Edutechbharat.com

AI and Critical Thinking: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से पढ़ाई करना हो, ऑफिस की रिपोर्ट तैयार करनी हो या किसी मुश्किल सवाल का जवाब खोजना हो—अब कुछ ही सेकंड में समाधान मिल जाता है। लेकिन इस सुविधा के बीच एक अहम सवाल भी उठ रहा है: क्या AI पर बढ़ती निर्भरता हमारी स्वतंत्र रूप से सोचने, तर्क करने और कठिन समस्याओं को हल करने की आदत को प्रभावित कर सकती है?

बांग्लादेश की यूनिवर्सिटी ऑफ राजशाही, अमेरिका की मार्शल यूनिवर्सिटी और जापान की यूनिवर्सिटी ऑफ आइज़ू से जुड़े शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में इसी सवाल की पड़ताल की है। शोधपत्र ‘Critical Thinking in the Age of Artificial Intelligence: A Survey-Based Study with Machine Learning Insights’ में AI इस्तेमाल करने की आदतों और बिना सहायता के तर्क करने की क्षमता के बीच संबंधों का विश्लेषण किया गया है। यह शोध 18 मार्च 2026 को arXiv पर प्रीप्रिंट के रूप में प्रस्तुत किया गया था। ।

अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि AI समय बचाने और सीखने में मदद कर सकता है, लेकिन उस पर अधिक निर्भरता और कठिन समस्याओं पर प्रयास जारी रखने में कम धैर्य जैसी प्रवृत्तियां कमजोर तर्क-प्रदर्शन से जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि, यह अध्ययन छोटा और खोजपरक है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि AI इस्तेमाल करने से हर व्यक्ति की सोचने की क्षमता कमजोर हो जाती है। <Cite refs={[“turn622833academia12″,”turn622833search0”]}/>

22 प्रतिभागी, सात तर्क-परीक्षण: कैसे किया गया अध्ययन?

शोधकर्ताओं ने 22 प्रतिभागियों के साथ साक्षात्कार आधारित सर्वे किया। इनमें अधिकांश विद्यार्थी थे, जबकि कुछ फ्रीलांसर, स्व-रोजगार करने वाले और एक पेशेवर भी शामिल थे।

अध्ययन में दो प्रमुख पहलुओं पर ध्यान दिया गया:

  • AI इस्तेमाल करने का व्यवहार: लोग AI का उपयोग कितनी सहजता से करते हैं, उसके बिना कितना असहज महसूस करते हैं, अपनी कार्यक्षमता को कैसे देखते हैं और कठिन समस्याओं पर कितना धैर्य रखते हैं।
  • बिना सहायता के तर्क करने की क्षमता: प्रतिभागियों से सात छोटे तर्क एवं गणना संबंधी सवाल हल करवाए गए, जिनमें संख्यात्मक, बीजगणितीय, अनुपात, समय और मशीन-उत्पादकता से जुड़े प्रश्न शामिल थे।

इन सात सवालों में सही उत्तरों के आधार पर Critical Thinking Score (CTS) तैयार किया गया। शोधकर्ताओं ने इसके बाद सांख्यिकीय विश्लेषण और मशीन लर्निंग तकनीकों के जरिए अलग-अलग व्यवहारगत प्रवृत्तियों की पहचान करने की कोशिश की। <Cite refs={[“turn622833academia12″,”turn622833search0”]}/>

68.25% रहा औसत Critical Thinking Score

अध्ययन में प्रतिभागियों का औसत Critical Thinking Score 68.25% रहा। सात सवालों में इसका मतलब औसतन लगभग 4.78 सही उत्तर था।

कुछ सवाल प्रतिभागियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हुए। मशीन-उत्पादकता से जुड़े सवाल में सबसे अधिक गलतियां दर्ज की गईं। इसके बाद दवा की गोलियां लेने के समय से संबंधित सवाल और बैट-बॉल वाला तार्किक प्रश्न अपेक्षाकृत कठिन रहे।

इन सवालों की खासियत यह है कि इनमें केवल गणना करना पर्याप्त नहीं होता। कई बार सही उत्तर तक पहुंचने के लिए पहली सहज प्रतिक्रिया पर दोबारा विचार करना और सवाल की शर्तों को ध्यान से समझना पड़ता है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 68.25% का स्कोर अपने आप में यह साबित नहीं करता कि प्रतिभागियों की सोचने की क्षमता AI के कारण कम हुई। अध्ययन ने उनके मौजूदा तर्क-प्रदर्शन को मापा; AI इस्तेमाल शुरू करने से पहले और बाद की क्षमता की तुलना नहीं की गई थी। <Cite refs={[“turn622833academia12″,”turn622833search0”]}/>

Cognitive Offloading: जब मशीन लेने लगे मानसिक मेहनत की जगह

इस अध्ययन से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक है Cognitive Offloading, यानी मानसिक काम का कुछ हिस्सा बाहरी उपकरणों की मदद से पूरा करना।

मिसाल के तौर पर, कोई विद्यार्थी गणित का सवाल देखते ही AI से पूरा समाधान मांग लेता है। उसे सही उत्तर मिल सकता है, लेकिन अगर वह स्वयं सवाल हल करने की कोशिश ही नहीं करता, तो उसे अपनी गलती पहचानने, अलग-अलग तरीकों से सोचने और तर्क विकसित करने का अवसर कम मिल सकता है।

इसके विपरीत, यदि विद्यार्थी पहले खुद प्रयास करे और फिर AI से संकेत या स्पष्टीकरण मांगे, तो वही तकनीक सीखने में मददगार हो सकती है।

इसलिए Cognitive Offloading हमेशा नुकसानदायक नहीं है। चुनौती तब आती है, जब समय बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण धीरे-धीरे स्वयं सोचने और निर्णय लेने का विकल्प बन जाए।

AI पर निर्भरता और घटता धैर्य: शोध में क्या सामने आया?

सर्वे में कई प्रतिभागियों ने AI से काम जल्दी होने और सीखने में सहायता मिलने की बात कही। दूसरी ओर, कुछ ने कठिन समस्याओं पर लंबे समय तक विचार करने में कम धैर्य महसूस करने की भी जानकारी दी।

शोधकर्ताओं के विश्लेषण में AI के बिना असहजता और समस्या सुलझाने में कम धैर्य जैसी प्रवृत्तियां कमजोर Critical Thinking Score से जुड़ी दिखाई दीं।

इसे समझने के लिए एक उदाहरण लें। किसी विद्यार्थी को भौतिकी का कठिन सवाल मिलता है। वह पांच मिनट तक प्रयास करने के बाद AI से हल मांग लेता है। यदि वह समाधान के हर चरण को समझता है और फिर स्वयं सवाल हल करता है, तो AI उसका सहायक बनता है। लेकिन यदि वह केवल उत्तर कॉपी करता है, तो सीखने के लिए जरूरी मानसिक अभ्यास अधूरा रह सकता है।

शोध का महत्वपूर्ण संकेत यही है कि AI से मिलने वाली सुविधा और स्वतंत्र रूप से समस्या हल करने की क्षमता एक ही चीज नहीं हैं। किसी काम को जल्दी पूरा कर लेना जरूरी नहीं कि उस विषय की गहरी समझ भी विकसित हो गई हो। <Cite refs={[“turn622833academia12″,”turn622833search0”]}/>

मशीन लर्निंग ने पहचानीं AI उपयोगकर्ताओं की तीन संभावित श्रेणियां

शोधकर्ताओं ने K-Means Clustering नामक मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल करके प्रतिभागियों के व्यवहार में समानताएं खोजीं। विश्लेषण में तीन संभावित प्रोफाइल सामने आए।

1. Over-Reliant Users — AI पर अधिक निर्भर उपयोगकर्ता

इस समूह में AI के बिना अधिक असहजता और कठिन समस्याओं पर कम धैर्य जैसी प्रवृत्तियां दिखाई दीं। इस क्लस्टर का औसत तर्क-स्कोर भी सबसे कम था।

2. Mixed-Strategy Users — मिश्रित रणनीति अपनाने वाले उपयोगकर्ता

ये उपयोगकर्ता कुछ सवाल स्वयं हल करने की कोशिश करते हैं, जबकि दूसरी परिस्थितियों में AI की मदद लेते हैं। इस समूह का औसत CTS सबसे अधिक था, लेकिन इसके सदस्यों के स्कोर में भी काफी अंतर था।

3. Balanced Support-Seekers — संतुलित सहायता लेने वाले उपयोगकर्ता

इस प्रोफाइल में AI का इस्तेमाल स्वयं सोचने के शुरुआती प्रयास के बाद सहायता के लिए करने की प्रवृत्ति शामिल थी। इसका उद्देश्य AI को विचार-विमर्श और सीखने के सहयोगी के रूप में इस्तेमाल करना है, न कि स्वतंत्र प्रयास का विकल्प बनाना।

ये तीनों श्रेणियां छोटे नमूने पर आधारित खोजपरक परिणाम हैं। इन्हें AI उपयोगकर्ताओं के लिए अंतिम या सार्वभौमिक वर्गीकरण नहीं माना जाना चाहिए। <Cite refs={[“turn622833academia12″,”turn622833search0”]}/>

शिक्षा व्यवस्था के लिए क्या है इसका मतलब?

AI के बढ़ते इस्तेमाल ने शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के सामने एक नई चुनौती खड़ी की है। विद्यार्थियों को तकनीक से दूर रखना व्यावहारिक समाधान नहीं है। अधिक जरूरी यह है कि उन्हें AI का इस्तेमाल करते समय सवाल पूछने, उत्तर की जांच करने और अपनी समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

इसके लिए स्कूल और कॉलेज कुछ तरीके अपना सकते हैं:

  • AI से समाधान मांगने से पहले विद्यार्थी अपना प्रारंभिक उत्तर लिखें।
  • AI के उत्तर में मौजूद तथ्यों और तर्कों की जांच करें।
  • एक ही समस्या के दो या तीन संभावित समाधानों की तुलना करें।
  • नियमित रूप से बिना AI की सहायता के तर्क-परीक्षण कराएं।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे AI से मिले समाधान को अपने शब्दों में समझाएं।

इससे यह परखा जा सकेगा कि विद्यार्थी केवल तैयार उत्तर प्राप्त कर रहे हैं या वास्तव में विषय को समझ भी रहे हैं।

Edutech Bharat का दृष्टिकोण: AI को विकल्प नहीं, सहयोगी बनाएं

AI की असली उपयोगिता केवल जवाब देने में नहीं, बल्कि इंसान को बेहतर सवाल पूछने, कठिन विषय समझने और संभावित समाधानों की जांच करने में मदद देने में है।

शोध यह संकेत देता है कि AI के प्रभाव को समझने के लिए केवल उसके इस्तेमाल की आवृत्ति देखना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि व्यक्ति तकनीक का इस्तेमाल किस तरह करता है, क्या वह उत्तरों को परखता है और क्या वह बिना AI के भी समस्या पर विचार करने का अभ्यास बनाए रखता है।

इस अध्ययन की सीमाएं भी महत्वपूर्ण हैं। केवल 22 प्रतिभागियों पर आधारित सर्वे से पूरी आबादी के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते। सात सवालों का स्कोर भी Critical Thinking की संपूर्ण क्षमता को नहीं मापता। यह अध्ययन AI के उपयोग और तर्क-प्रदर्शन के बीच संभावित संबंध दिखाता है, प्रत्यक्ष कारण-परिणाम साबित नहीं करता।

निष्कर्ष यही है कि AI अपने आप में न तो सोचने की क्षमता का दुश्मन है और न ही उसका विकल्प। असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक हमारी मानसिक मेहनत को पूरी तरह अपने हाथ में लेने के बजाय हमारी समझ, विवेक और स्वतंत्र निर्णय क्षमता को मजबूत करे।


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मूल स्रोत: Bari et al., Critical Thinking in the Age of Artificial Intelligence: A Survey-Based Study with Machine Learning Insights, arXiv:2604.18590v1. .