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BITS Pilani के छात्रों ने बनाया भारत का पहला स्वदेशी Humanoid Robot, फिर उसी अनुभव से खड़ी की GreyOrange की ग्लोबल कहानी

EdutechBharat.com | Startup Story

कल्पना कीजिए, एक कॉलेज की Robotics Lab में कुछ undergraduate छात्र पुराने motors और scrap aluminium से एक robot बनाना शुरू करते हैं। उनके पास न कोई बड़ी सरकारी laboratory है, न कोई विशाल corporate budget और न ही यह तय है कि उनका प्रयोग आगे जाकर क्या रूप लेगा।

लेकिन यही छोटा-सा प्रयोग कुछ वर्षों बाद भारत की robotics और startup ecosystem की सबसे दिलचस्प कहानियों में बदल जाता है।

यह कहानी है BITS Pilani के AcYut humanoid robot और उससे आगे निकलकर GreyOrange जैसा global warehouse-robotics startup बनाने वाले छात्रों की।

Scrap aluminium से शुरू हुआ AcYut का सफर

BITS Pilani के Centre for Robotics and Intelligent Systems (CRIS) में undergraduate छात्रों की एक टीम ने सबसे पहले एक छोटा biped robot तैयार किया। टीम के पास उपलब्ध संसाधन सीमित थे। AcYut की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार शुरुआती prototype scrap aluminium और robotics lab में पड़े पुराने motors से बनाया गया था।

उस prototype के सफल होने के बाद छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने लक्ष्य बड़ा कर लिया—ऐसा humanoid robot बनाना जो इंसान की तरह चल सके और कई मानवीय गतिविधियां कर सके।

इसका नाम रखा गया AcYut, जिसका संस्कृत में अर्थ है—अविनाशी या जिसका क्षय न हो।

14 मार्च 2008 को BITS Pilani ने AcYut 1.0 को प्रस्तुत किया। टीम के अनुसार यह भारत का पहला स्वदेशी रूप से निर्मित humanoid robot था। AcYut चल सकता था, लड़ सकता था और यहां तक कि Bollywood गानों पर dance भी कर सकता था।

यह उपलब्धि केवल एक robot बनाने तक सीमित नहीं थी। छात्रों ने mechanical engineering, electronics, programming, control systems, sensors और artificial intelligence जैसे कई क्षेत्रों को एक ही project में जोड़ दिया था।

जब कॉलेज की टीम पहुंची अंतरराष्ट्रीय मंच पर

AcYut-II के साथ टीम ने अंतरराष्ट्रीय robotics competitions का रुख किया।

2009 में AcYut ने San Francisco में आयोजित RoboGames में भारत का प्रतिनिधित्व किया। AcYut की अपनी उपलब्धि सूची के अनुसार 2009 में humanoid competition में उसे Bronze medal मिला, जबकि 2010 RoboGames में AcYut-II ने Gold medal जीता।

BITS के दस्तावेजों में Samay Kohli और Akash Gupta को AcYut टीम के प्रमुख सदस्यों के रूप में दर्ज किया गया है। बाद में दोनों ने दुनिया के अलग-अलग देशों में robotics competitions में हिस्सा लिया। BITS की एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार Samay Kohli और Akash Gupta ने robotics competitions में 13 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

AcYut की टीम ने आगे Carnegie Mellon University, Stanford University, IIT Delhi, IIT Bombay, IISc और कई अन्य संस्थानों में भी demonstrations किए।

यानी BITS की robotics laboratory अब केवल campus project नहीं रह गई थी।

लेकिन असली बदलाव अभी बाकी था

यहीं इस कहानी में एक बड़ा मोड़ आता है।

Humanoid robot बनाना तकनीकी उपलब्धि थी, लेकिन छात्रों के सामने सवाल था—

क्या robotics केवल competitions और medals तक सीमित रहेगी, या इसका इस्तेमाल किसी वास्तविक industrial problem को हल करने में किया जा सकता है?

इसी सोच ने आगे चलकर Samay Kohli और Akash Gupta को entrepreneurship की ओर धकेला।

दोनों ने robotics के साथ-साथ workshops और practical projects पर भी काम किया। इसी दौरान उन्हें यह समझ आने लगा कि robotics की सबसे बड़ी ताकत केवल इंसान जैसा robot बनाना नहीं है।

बल्कि असली अवसर वहां है जहां कोई repetitive, कठिन और बड़े पैमाने का काम मशीनों से कराया जा सकता है।

Humanoid छोड़कर Warehouse Robot की ओर

यही वह फैसला था जिसने पूरी कहानी बदल दी।

Samay Kohli और Akash Gupta ने humanoid robotics के अनुभव को industrial automation की दिशा में मोड़ने का फैसला किया।

2011 में दोनों ने GreyOrange की शुरुआत की।

BITS Pilani की आधिकारिक सामग्री भी दोनों को GreyOrange के co-founders के रूप में दर्ज करती है।

GreyOrange ने humanoid robot बनाने के बजाय warehouse और supply-chain industry की एक बेहद व्यावहारिक समस्या पर ध्यान दिया—

गोदाम में सामान को सही जगह तक तेजी और सटीकता से कैसे पहुंचाया जाए?

यही सवाल आगे चलकर कंपनी का पूरा business model बना।

कॉलेज की पढ़ाई और Startup, दोनों साथ

GreyOrange की शुरुआत किसी बड़े corporate office से नहीं हुई थी।

Akash Gupta उस समय अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे थे और startup को भी संभाल रहे थे। यानी एक तरफ college laboratories और दूसरी तरफ दिल्ली में कंपनी का शुरुआती काम।

यह उन छात्रों के लिए खास सबक है जो मानते हैं कि startup शुरू करने के लिए पहले college खत्म करना जरूरी है।

GreyOrange की शुरुआती कहानी दिखाती है कि college projects, competitions और internships केवल resume बनाने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक products और companies की नींव भी बन सकते हैं।

पहली पूंजी से Global Robotics तक

GreyOrange को शुरुआती दौर में BITS alumni network और Blume Ventures जैसे investors से समर्थन मिला। इसके बाद Tiger Global जैसे बड़े निवेशकों ने भी कंपनी में निवेश किया।

कंपनी ने धीरे-धीरे भारत से बाहर अपना विस्तार किया और warehouse automation के लिए robotics और software solutions विकसित किए।

BITS की सामग्री में GreyOrange को AI-driven software और mobile robots पर काम करने वाली technology startup के रूप में वर्णित किया गया है, जिसकी पहुंच Asia-Pacific, Europe और Americas तक बनी।

Humanoid Robot से Warehouse Robot तक

AcYut का उद्देश्य इंसान जैसा robot बनाना था।

GreyOrange का उद्देश्य कुछ अलग था।

यहां robot को इंसान जैसा दिखना जरूरी नहीं था।

उसे बस एक काम—

सामान को warehouse में तेज, सुरक्षित और सही तरीके से move करना था।

यही बदलाव इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण entrepreneurial lesson है।

एक humanoid robot competition जीत सकता है।

लेकिन warehouse में हजारों बार एक ही काम को बिना थके करने वाला robot किसी कंपनी के लिए वास्तविक आर्थिक मूल्य पैदा कर सकता है।

GreyOrange ने इसी industrial problem पर अपना पूरा business खड़ा किया।

आज GreyOrange किस क्षेत्र में है?

GreyOrange अब warehouse automation और fulfillment robotics के क्षेत्र में काम करती है।

कंपनी autonomous mobile robots और AI-driven software के जरिए warehouses और fulfillment centres में goods movement, sorting और अन्य operations को automate करने पर केंद्रित है।

कंपनी का software platform GreyMatter robots और warehouse operations को coordinate करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

BITS के अनुसार GreyOrange के solutions का इस्तेमाल बड़े global customers के warehouse operations में किया गया है।

AcYut की कहानी खत्म नहीं हुई

दिलचस्प बात यह है कि GreyOrange बनने के बाद भी BITS Pilani में AcYut की कहानी आगे बढ़ती रही।

AcYut की official website इसे BITS Pilani के Centre for Robotics and Intelligent Systems में undergraduate students द्वारा विकसित humanoid series के रूप में दर्ज करती है। Robot ने RoboCup, RoboGames, Carnegie Mellon University और Stanford सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

यानी एक तरफ AcYut ने academic robotics research और student innovation की परंपरा को आगे बढ़ाया और दूसरी तरफ उसी ecosystem से निकले छात्रों ने industrial robotics में एक global company खड़ी कर दी।

इस कहानी से भारतीय छात्रों को क्या सीख मिलती है?

AcYut और GreyOrange की कहानी केवल दो robots की कहानी नहीं है।

यह बताती है कि एक अच्छा college project किस तरह career और entrepreneurship की दिशा बदल सकता है।

पहला सबक— महंगी laboratory से ज्यादा जरूरी है समस्या हल करने की क्षमता।

दूसरा— robotics जैसे interdisciplinary क्षेत्र में mechanical engineering, electronics, computer science, AI और control systems का मेल जरूरी है।

तीसरा— competition केवल medal जीतने का माध्यम नहीं है। वह product को दुनिया के सामने test करने का अवसर भी है।

चौथा— हर technology को business बनाने के लिए यह देखना जरूरी है कि वह किस वास्तविक समस्या को हल कर रही है।

और शायद सबसे बड़ा सबक—

AcYut ने छात्रों को robot बनाना सिखाया, लेकिन GreyOrange ने उन्हें यह सिखाया कि robot से वास्तविक दुनिया की समस्या कैसे हल की जाती है।

भारत के College Campuses में छिपी Startup शक्ति

आज भारत में IIT, BITS, IISc और दूसरे engineering campuses में robotics, AI, drones, semiconductor, electric mobility और deep-tech पर हजारों student projects बन रहे हैं।

लेकिन AcYut की कहानी बताती है कि किसी project की असली ताकत केवल उसकी technical complexity में नहीं होती।

कभी-कभी एक college laboratory में बनाया गया prototype पहले competition जीतता है, फिर छात्रों को दुनिया दिखाता है और अंततः वही अनुभव एक ऐसी कंपनी का आधार बन सकता है जो global industry को बदलने की कोशिश करे।

AcYut से GreyOrange तक का सफर इसी transformation की कहानी है—Student Project से Global Deep-Tech Startup तक।

Official Links

GreyOrange: https://www.greyorange.com/

Team AcYut – BITS Pilani: https://www.acyut.com/

BITS Pilani – Centre for Robotics and Intelligent Systems: https://www.bits-pilani.ac.in/pilani/centre-for-robotics-and-intelligent-systems/