नई दिल्ली। भारतीय वैज्ञानिकों के एक नए शोध में सूर्य के व्यवहार को लेकर एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। अध्ययन में पाया गया है कि सूर्य का ऊपरी वायुमंडल (क्रोमोस्फीयर) उसकी दृश्यमान सतह (फोटोस्फीयर) की तुलना में अधिक तेज़ी से घूमता है। यह निष्कर्ष सूर्य के घूर्णन से जुड़े पारंपरिक सिद्धांतों को नई दृष्टि प्रदान करता है।
यह शोध आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), उदयपुर सोलर ऑब्जर्वेटरी (USO), भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) और अहमदनगर कॉलेज के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से किया है। शोध के प्रमुख लेखक श्रीन्जना राउथ, डॉ. अंशु कुमारी, डॉ. वैभव पंत, जयदीप कांडेकर, डॉ. दीपांकर बनर्जी, मोहम्मद सलीम खान और डिब्या कीर्ति मिश्रा हैं। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Astronomy & Astrophysics Letters में प्रकाशित हुआ है।IIT मद्रास ने विकसित की नई कूलिंग तकनीक, ओवरहीटिंग से बचेंगे स्मार्टफोन, लैपटॉप और रक्षा उपकरण

शोधकर्ताओं ने जापान के नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ से वर्ष 1992 से 2020 तक प्राप्त 17 गीगाहर्ट्ज़ रेडियो प्रेक्षणों का विश्लेषण किया। इन रेडियो चित्रों के माध्यम से वैज्ञानिकों ने सूर्य के ऊपरी क्रोमोस्फीयर की घूर्णन गति का अध्ययन किया। रेडियो तरंगों के उपयोग से अलग-अलग ऊँचाइयों पर होने वाले तापमान के प्रभाव को कम किया जा सकता है, जिससे अधिक विश्वसनीय परिणाम प्राप्त हुए।
अध्ययन में पाया गया कि सूर्य का ऊपरी क्रोमोस्फीयर सभी अक्षांशों पर फोटोस्फीयर की तुलना में तेज़ी से घूमता है। साथ ही यह भी देखा गया कि जैसे-जैसे सूर्य की सतह से ऊँचाई बढ़ती है, घूर्णन गति भी बढ़ती जाती है। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जब सूर्य पर सनस्पॉट (सूर्य धब्बों) की संख्या अधिक होती है, तब भूमध्यरेखीय घूर्णन गति में हल्की कमी देखी जाती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार यह निष्कर्ष सूर्य के वायुमंडल की जटिल गतिशीलता को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। सूर्य की गतिविधियाँ अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) को प्रभावित करती हैं, जिसका सीधा असर उपग्रहों, संचार प्रणालियों, नेविगेशन नेटवर्क और पृथ्वी के विद्युत ग्रिड पर पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में विभिन्न तरंगदैर्घ्यों पर समन्वित अवलोकनों से सूर्य के वायुमंडल की संरचना और उसके घूर्णन तंत्र को और अधिक स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा। यह अध्ययन सौर भौतिकी और अंतरिक्ष मौसम अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।





