चेन्नई, 27 जुलाई 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के शोधकर्ताओं ने एक नई कूलिंग तकनीक विकसित की है, जो कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उत्पन्न होने वाली अत्यधिक गर्मी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकती है। यह तकनीक भविष्य में स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेटा सेंटर, रक्षा प्रणालियों और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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शोधकर्ताओं ने फ्लैट प्लेट पल्सेटिंग हीट पाइप (Flat Plate Pulsating Heat Pipe-FPPHP) का एक नया डिजाइन तैयार कर उसका सफल परीक्षण किया है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगातार छोटे और अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं, जिसके कारण उनमें उत्पन्न होने वाली गर्मी उनके प्रदर्शन और विश्वसनीयता के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
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IIT मद्रास की टीम ने पारंपरिक डिजाइन से अलग एक एंटीपैरलल कॉन्फ़िगरेशन विकसित किया है, जिसमें गर्मी अवशोषित करने वाला भाग (इवैपोरेटर) और गर्मी छोड़ने वाला भाग (कंडेंसर) प्लेट के विपरीत हिस्सों में स्थित हैं। यह डिजाइन सीमित स्थान वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।
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अध्ययन में पाया गया कि ओ-रिंग आधारित सीलिंग कॉन्फ़िगरेशन ने पारंपरिक गैस्केट आधारित डिजाइन की तुलना में अधिक गर्मी की स्थिति में 16 प्रतिशत कम थर्मल रेजिस्टेंस दर्ज की, जिससे कूलिंग क्षमता बेहतर हुई। वहीं, तांबे के बजाय एल्युमिनियम का उपयोग करने पर उपकरण का वजन कम होने के साथ-साथ थर्मल रेजिस्टेंस में लगभग 20 प्रतिशत की कमी भी देखी गई।
यह शोध IIT मद्रास के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अरविंद पट्टामट्टा और डॉ. पल्लब सिन्हा महापात्रा के नेतृत्व में किया गया। इस परियोजना में IIT मद्रास, श्री शिवसुब्रमणिया नादर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, चेन्नई तथा इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (IRDE), देहरादून के शोधकर्ताओं ने भी सहयोग किया।
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प्रो. अरविंद पट्टामट्टा के अनुसार, यह प्रणाली एक बंद ट्यूब की तरह कार्य करती है, जिसमें मौजूद द्रव गर्म होने पर वाष्पित होकर ठंडे हिस्से तक पहुंचता है, वहां संघनित होता है और फिर वापस लौट आता है। यह प्राकृतिक चक्र बिना किसी अतिरिक्त ऊर्जा के लगातार गर्मी को बाहर निकालता रहता है।
शोधकर्ताओं ने हीट पाइप की आंतरिक सतह को सुपरहाइड्रोफिलिक बनाकर भी परीक्षण किया। इससे द्रव का प्रवाह बेहतर हुआ और थर्मल रेजिस्टेंस में लगभग 16 प्रतिशत की अतिरिक्त कमी दर्ज की गई।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, रक्षा एवं एयरोस्पेस प्रणालियों, रडार, एवियोनिक्स तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी और पावर कन्वर्टर जैसी प्रणालियों में बेहतर तापीय प्रबंधन सुनिश्चित करने में उपयोगी साबित हो सकती है।
इस परियोजना को रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर–DRDO, IIT मद्रास रिसर्च पार्क का सहयोग प्राप्त हुआ। शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यू जर्नल Experimental Heat Transfer में प्रकाशित किए गए हैं।
- 16% कम थर्मल रेजिस्टेंस: इसके ओ-रिंग (O-ring) कॉन्फ़िगरेशन के कारण यह उपकरण 16 प्रतिशत कम थर्मल रेजिस्टेंस प्रदान करता है, जिससे गर्मी तेजी से बाहर निकलती है।
- तांबे से बेहतर एल्युमीनियम: परीक्षणों के दौरान एल्युमीनियम से बने प्रोटोटाइप्स ने पारंपरिक तांबे (Copper) की तुलना में लगभग 20% बेहतर प्रदर्शन किया।
- एडवांस ट्रीटमेंट: शोधकर्ताओं ने इस कूलिंग सिस्टम की दक्षता को और बढ़ाने के लिए सुपरहाइड्रोफिलिक सरफेस ट्रीटमेंट (Superhydrophilic surface treatment) का भी उपयोग किया है।
किन क्षेत्रों में होगा फायदा?
यह तकनीक भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इसका मुख्य उपयोग निम्नलिखित में होगा: - स्मार्टफोन, लैपटॉप और मिनी कंप्यूटर्स
- डेटा सेंटर्स (Data Centres)
- डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस सिस्टम
- अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रिक गाड़ियां (Electric Vehicles)
यह नया ब्रेकथ्रू इन सभी उपकरणों को अधिक सुरक्षित, ऊर्जा-कुशल (Energy-Efficient) और टिकाऊ बनाएगा।
‘एक्सपेरिमेंटल हीट ट्रांसफर’ में प्रकाशित हुआ शोध
आईआईटी मद्रास का यह महत्वपूर्ण शोध प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका ‘एक्सपेरिमेंटल हीट ट्रांसफर’ (Experimental Heat Transfer) में प्रकाशित हुआ है। थर्मल मैनेजमेंट के क्षेत्र में इस खोज को अगले कदम के रूप में देखा जा रहा है





